अंतर्राष्ट्रीय
15-Jun-2026
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-अमेरिकी हेल्थकेयर पर उठे सवाल वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका की महंगी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर दुनिया भर में चर्चा और विवादों के केंद्र में आ गई है। एक अमेरिकी महिला ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर दावा किया है कि जिस दवा के लिए उसे अमेरिका में 1000 डॉलर यानी लगभग 95,000 रुपये अपनी जेब से खर्च करने पड़ रहे थे, वही दवा भारत से सीधे मंगवाने पर उसे शिपिंग चार्ज सहित मात्र 25 डॉलर (करीब 2,377 रुपये) में मिल गई। इस चौंकाने वाले वाकये के बाद महिला ने अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली को खुलकर एक बड़ा ‘स्कैम’और ठगी करार दिया है। सोशल मीडिया पर विक्टोरिया नाम की इस महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम की विसंगतियों पर गंभीर सवाल उठा रही है। वीडियो में विक्टोरिया ने बताया कि उसे एक विशेष दवा के छह छोटे टैबलेट्स की जरूरत थी। चूंकि उसकी अमेरिकी इंश्योरेंस कंपनी इस दवा का खर्च उठाने से मना कर रही थी, इसलिए उसे इसके लिए 1000 डॉलर की भारी-भरकम राशि खुद चुकानी पड़ रही थी। इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बजाय जब उसने अन्य विकल्पों की तलाश की, तो उसके डॉक्टर ने ही उसे एक अनोखी सलाह दी। डॉक्टर ने कहा कि वह अपना प्रिस्क्रिप्शन एक कनाडाई फार्मेसी को भेजे, जो सीधे भारत के दवा निर्माताओं से संपर्क कर दवाएं मंगवाती है। महिला ने डॉक्टर की सलाह मानते हुए ऐसा ही किया। उसे लगा था कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के कारण शायद 100 या 200 डॉलर खर्च होंगे, लेकिन असली कीमत जानकर वह दंग रह गई। कनाडाई फार्मेसी ने उसे बताया कि दवा की कुल लागत सिर्फ 25 डॉलर आएगी, जिसमें से दवा की वास्तविक कीमत मात्र 10 डॉलर (लगभग 950 रुपये) थी और बाकी के 15 डॉलर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग चार्ज के थे। भारत की दवा निर्माता कंपनी से सीधे उसके घर तक सुरक्षित रूप से दवा डिलीवर कर दी गई। इसके बाद महिला ने गुस्से में अमेरिकी सिस्टम पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारा हेल्थकेयर सिस्टम पूरी तरह मजाक बन चुका है। उसने सवाल उठाया कि जो दवा भारत से 10 डॉलर में मिल सकती है, उसके लिए अमेरिका में 1000 डॉलर किस बात के वसूले जा रहे थे और यह अतिरिक्त पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा था? वीडियो वायरल होने के बाद हुई आलोचना इस वीडियो के वायरल होने के बाद वैश्विक स्तर पर अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था की कड़ी आलोचना हो रही है, जबकि भारत के सुदृढ़ और किफायती दवा उद्योग (फार्मास्युटिकल सेक्टर) की जमकर तारीफ की जा रही है। सोशल मीडिया पर कई अन्य विदेशी यूजर्स ने भी अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा कि भारत में यह दवा स्थानीय स्तर पर शायद 100 रुपये (लगभग 1.20 डॉलर) में ही मिल जाती है। वहीं, एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि अमेरिका में इतनी महंगी दवा खरीदने से बेहतर है कि इंसान भारत घूमने आए, एक हफ्ते तक छुट्टियों का आनंद ले, वहां से दवा खरीदे और वापस अमेरिका लौट जाए; तब भी उसका कुल खर्च 1000 डॉलर से कम ही बैठेगा। वीरेंद्र/ईएमएस 15 जून 2026