राष्ट्रीय
15-Jun-2026
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इंफाल (ईएमएस)। मणिपुर राज्य में अनोखा बाजार लगता है जिसे ‘मां का बाजार’ भी कहा जाता है। इंफाल में लगाने वाला यह इमा कैथेल बाजार दुनिया के सबसे अनोखे बाजारों में से एक माना जाता है। ‘इमा’ का अर्थ मां और ‘कैथेल’ का अर्थ बाजार होता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां व्यापार की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं के हाथों में है। बाजार की सभी दुकानें महिलाओं द्वारा संचालित की जाती हैं और पुरुष यहां दुकानदार के रूप में काम नहीं कर सकते। करीब 500 वर्ष पुराने इस बाजार का इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, उस समय मणिपुर में प्रचलित ‘लल्लूप-कबा’ व्यवस्था के तहत पुरुषों को अक्सर सैन्य सेवाओं या अन्य कार्यों के लिए घर से दूर भेजा जाता था। ऐसे में महिलाओं ने स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों की जिम्मेदारी संभाली। धीरे-धीरे यह व्यवस्था इतनी मजबूत हो गई कि पूरा बाजार महिलाओं के नियंत्रण में आ गया और आज भी यह परंपरा कायम है। इमा कैथेल में वर्तमान में 5,000 से अधिक महिला विक्रेता कारोबार करती हैं। यहां सब्जियां, फल, मछली, मसाले, पारंपरिक वस्त्र, हस्तशिल्प उत्पाद, आभूषण और घरेलू उपयोग की वस्तुएं बेची जाती हैं। कई दुकानों का संचालन एक ही परिवार की पीढ़ियां करती आई हैं। मां से बेटी को दुकान सौंपने की परंपरा ने इस बाजार को एक सांस्कृतिक विरासत का रूप दे दिया है। यह बाजार केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि मणिपुर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। यहां आसपास के गांवों और कृषि क्षेत्रों से सीधे उत्पाद लाए जाते हैं, जिससे स्थानीय किसानों, बुनकरों और कारीगरों को बड़ा बाजार उपलब्ध होता है। यही कारण है कि इमा कैथेल राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इमा कैथेल का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। यहां की महिलाओं ने सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में भी अहम भूमिका निभाई है। वर्ष 1904 और 1939 में हुए प्रसिद्ध ‘नूपी लान’ यानी महिला आंदोलनों में बाजार की महिला व्यापारियों ने ब्रिटिश शासन की नीतियों और आर्थिक शोषण के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। सुदामा/ईएमएस 15 जून 2026