- कई आधुनिक इमारतों में लगे हैं सेंट्रल कूलिंग सिस्टम, बिल्डिंग को रखते हैं ठंडा रियाद,(ईएमएस)। दुबई का नाम सुनते ही दिमाग में ऊंची-ऊंची इमारतें, लग्जरी लाइफस्टाइल और भीषण गर्मी की तस्वीर सामने आने लगती है। गर्मियों में यहां तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसे मौसम में एयर कंडीशनर कोई सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत बन जाता है। यही वजह है कि दुबई में घरों, ऑफिसों, मॉल और होटलों में करीब 24 घंटे एसी चलते हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि जब एसी दिन-रात चलते हैं तो वहां बिजली का बिल कितना आता होगा? मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कई हिस्सों में लोग गर्मियों के कुछ महीनों में ही एसी चलाते हैं, लेकिन दुबई में हालात अलग हैं। यहां साल के ज्यादातर मौसम काफी गर्म रहता है। मई से सितंबर तक की गर्मी इतनी ज्यादा होती है कि बिना एसी के घर के अंदर रहना भी मुश्किल हो सकता है। इसी कारण ज्यादातर घरों में एसी चलते रहते हैं। कई आधुनिक इमारतों में तो सेंट्रल कूलिंग सिस्टम लगा है, जो पूरी बिल्डिंग को ठंडा रखता है। दुबई में रहने वाले एक शख्स ने बताया कि बिजली का बिल हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे- घर का आकार कितना बड़ा है, परिवार में कितने लोग रहते हैं, एससी का इस्तेमाल कितना होता है, सेंट्रल एसी है या स्प्लिट एससी। यही वजह है कि किसी का बिल कम तो किसी का ज्यादा आता है। वह बताते हैं कि दुबई में रहने वाले एक छोटे परिवार का मासिक बिजली बिल आमतौर पर 300 से 800 दिरहम के बीच आता है। भारतीय रुपए में देखें तो यह लगभग 7,000 से 18,000 रुपए के आसपास बैठता है। वहीं, बड़े विला या लग्जरी घरों में रहने वाले लोगों का बिल 1,000 से 3,000 दिरहम यानी 20,000 से लेकर 70,000 रुपए या उससे ज्यादा तक पहुंच सकता है। दुबई में बिजली खपत का सबसे बड़ा कारण एयर कंडीशनिंग ही है। कई रिपोर्टों के मुताबिक गर्मियों में घर की कुल बिजली खपत का 60 से 70 फीसदी हिस्सा केवल एसी से जुड़ा होता है यानी अगर कोई व्यक्ति एसी का इस्तेमाल कम कर दे या तापमान थोड़ा बढ़ाकर रखे, तो उसके बिजली बिल में अच्छी-खासी बचत हो सकती है। दुबई में औसत आय कई देशों की तुलना में ज्यादा है। इसके अलावा कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को हाउसिंग अलाउंस और अन्य सुविधाएं भी देती हैं। कई रिहायशी इमारतों में कई एडवांस फैसिलिटी होती है, जिससे एनर्जी की बचत होती है। नई बिल्डिंग में बेहतर इंसुलेशन और स्मार्ट तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि एसी पर कम दबाव पड़े। इसलिए दुबई में एसी दिन-रात चलने के बावजूद लोग आधुनिक तकनीक और बेहतर ऊर्जा प्रबंधन की मदद से अपने खर्च को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। सिराज/ईएमएस 15 जून 2026