क्षेत्रीय
15-Jun-2026
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कोरबा (ईएमएस)। कोरबा-पश्चिम सुराकछार रेलवे साइडिंग से उड़ने वाली कोयले की धूल के कारण वार्ड 65 प्रेम नगर सहित आसपास के पांच ग्रामो के निवासी परेशान हैं। हवा चलने पर पंखा दफाई, भेरोताल, सुराकछार और पंखा दफाई तक महीन कोल डस्ट फैल जाती है, जिससे दमा, खांसी, सांस और आंखों से संबंधित बीमारियां बढ़ गई हैं। इस समस्या से त्रस्त होकर नगर निगम पार्षद प्रेम कुमार साहू सहित सैकड़ों ग्रामीणों पंखा दफाई रेलवे फाटक पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों का आरोप है कि सुराकछार भूमिगत खदान की रेल साइडिंग पर प्रतिदिन भारी वाहनों से कोयला गिराया और लोड किया जाता है। प्रबंधन की ओर से साइडिंग और सड़क पर पानी का छिड़काव नहीं किया जाता, जिससे धूल सीधे हवा में मिल जाती है। पार्षद प्रेम साहू ने पूर्व में कलेक्टर को पत्र लिखकर साइडिंग बंद करने मांग की थी। बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्यवाही न होने पर ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता चुना। जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारी सुबह से ही फाटक पर चटाई बिछाकर बैठ गए और धूल मुक्त गांव, स्वस्थ जीवन के नारे लगाने लगे। पार्षद प्रेम साहू ने बताया कि जब तक साइडिंग पर 24 घंटे वाटर स्प्रिंकलर, मिस्ट गन और फॉग कैनन नहीं लगाए जाते, कोयला लोडिंग के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने ग्रामो में स्वास्थ्य शिविर और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की। ग्रामीणों के अनुसार धूल के कारण उनके घरों की छतें, कपड़े और खाने-पीने की चीजें तक काली हो जाती हैं और छात्र-छात्राएं विद्यालय जाने में असमर्थ हो जाते हैं। चक्काजाम की सूचना मिलने पर कुसमुंडा थाना पुलिस और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और एसईसीएल प्रबंधन से बातचीत का आश्वासन दिया। हालांकि, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। पार्षद प्रेम साहू ने स्पष्ट किया कि लिखित आश्वासन और ठोस कदम उठाए बिना चक्काजाम समाप्त नहीं किया जाएगा। चिकित्सकों के अनुसार, कोयले की धूल में सिलिका और कार्बन के कण होते हैं, जो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और फेफड़ों का कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। - 15 जून