15-Jun-2026
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संजय सिंह बोले- संगठन के साथ दिल्ली-पंजाब की बड़ी जिम्मेदारी पाठक को दी थी नई दिल्ली,(ईएमएस)। आम आदमी पार्टी राघव चड्ढा बगावत कांड को अब तक समझ नहीं पाई है। पार्टी नेतृत्व अब भी हैरान है कि आखिर कैसे संदीप पाठक जैसे नेता ने साथ छोड़ दिया, जिन्हें संगठन में इतनी अहम जिम्मेदारी दी थी। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने स्वीकार किया है कि उन्हें या पार्टी में किसी को इस बात का अहसास नहीं था कि संदीप पाठक ऐसा कदम उठा सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक पॉडकास्ट में तेजतर्रार नेता और आप सांसद संजय सिंह ने राघव चड्ढा के समेत सात सांसदों के पार्टी छोड़ने पर ज्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन संदीप पाठक को लेकर बेहद हैरान नजर आए। उन्होंने अशोक मित्तल समेत कुछ राज्यसभा सांसदों को डराने और दबाव डालकर तोड़ने का आरोप लगाया है। संजय सिंह ने मरने दम तक उनके बीजेपी में ना जाने का दावा करते हुए राघव चड्ढा वाली बगावत पर जवाब दिया, आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि हर आदमी एक ही हौसले का होगा। अशोक मित्तल पर छापा पड़ा ईडी का, तीन दिन तक चलता रहा। उसके बेटे को प्रताड़ित किया गया, दबाव बनाया गया। चिट्ठी सामने रख दी गई साइन कर यदि बेटे को बचाना है तो। उनको डराया धमकाया गया, साइन करा लिया गया। राघव चड्ढा और आप के बीच दरार काफी बढ़ गई थी और बगावत से एक महीने पहले जब उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया गया था तभी यह साफ हो गया था कि राहें अब अलग होने वाली हैं। हालांकि, अचानक उनके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखे राघव चड्ढा को लेकर सभी लोग हैरान रह गए थे। संजय सिंह ने खुद को भी इसी आश्चर्च में बताया। पाठक को लेकर किए गए सवाल पर उन्होंने कहा, संदीप पाठक क्यों गए वही बता सकते हैं। मुझे भी आश्चर्य हुआ संदीप पाठक के जाने से अफसोस हुआ। संदीप पाठक को रोकने के सवाल पर संजय सिंह ने कहा कि इसकी भनक ही नहीं लगी। उन्होंने कहा कि रोकने की कोशिश तब होगी जब मैं जानूं कि आप जा रहे हो, या आपके मन में कुछ ऐसा है कि पार्टी छोड़ सकते हो। यह पूरी ईमानदारी से बता रहा हूं, इसमें कोई राजनीतिक चालबाजी नहीं कर रहा हूं। सीधे-सीधे बता रहा हूं कि कभी कोई एहसास भी नहीं हुआ तनिक भी कि ये पार्टी छोड़ सकते हैं। संदीप पाठक को नजरअंदाज किए जाने के सवाल पर सांसद सिंह ने कहा कि यह तो गलत बात है, संगठन के निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी संदीप पाठक को दी गई थी। पंजाब और दिल्ली में जिम्मेदारी दी गई, राज्यसभा में दी गई। यह तो गलत है कि उनकी उपेक्षा हो रही थी। ऐसा नहीं था। सिराज/ईएमएस 15जून26