15-Jun-2026
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सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई नई दिल्ली (ईएमएस)। बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई, इसके बाद शीर्ष अदालत ने मंत्री प्रकाश, बिहार सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान विशेष रूप से पूछा कि क्या प्रकाश अभी भी मंत्री पद पर बने हुए हैं, जिस पर याचिकाकर्ता के वकील ने हाँ में जवाब दिया। राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि दीपक प्रकाश, जो न विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं, उन्हें लगातार दूसरी बार मंत्री नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह भारतीय संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था के पूरी तरह खिलाफ है। याचिकाकर्ता के वकील सुदीप चंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि 14 नवंबर 2025 को बिहार चुनाव के नतीजे आने के बाद, 20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने पर प्रकाश को पंचायती राज मंत्री बनाया था। वे 15 अप्रैल 2026 तक इस पद पर रहे। इसके बाद में, बिहार सरकार में बदलाव हुआ और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 7 मई को दीपक प्रकाश को फिर पंचायती राज विभाग का मंत्री बनाया गया। वकील चंद्र ने तर्क दिया कि यह तरीका अनुच्छेद 164(4) का उल्लंघन है, जहाँ कोई भी व्यक्ति पांच माह 28 दिन मंत्री बनकर इस्तीफा दे और फिर से अगली सरकार में मंत्री बन जाए, यह संवैधानिक रूप से अनुमेय नहीं है। उन्होंने बताया कि दीपक प्रकाश को इस बार एमएलसी सीट के लिए भी नॉमिनेट नहीं किया गया है। याचिका में अदालत से क्वो वारंटो (अधिकार-पृच्छा) रिट जारी करने की मांग की गई है, ताकि यह जांचा जा सके कि दीपक किस संवैधानिक अधिकार के तहत मंत्री पद पर बने हुए हैं। साथ ही, मांग की गई है कि 7 मई तक उन्होंने जितनी भी योजनाएं पारित की हैं या संकल्प लिए हैं, उन्हें निरस्त किया जाए और उनके दूसरे कार्यकाल की नियुक्ति तथा वेतन-भत्तों को खारिज किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अब सभी संबंधित पक्षों से गंभीर मामले पर विस्तृत जवाब मांगा है। आशीष दुबे / 15 जून 2026