वाराणसी (ईएमएस) । आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी में कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ), केन्द्र सरकार के प्रतिनिधि कृषि विशेषज्ञों, कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों एवं प्रगतिशील किसानों की सहभागिता से खेत बचाओ अभियान, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं प्राकृतिक खेती विषयक एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में वाराणसी मंडल के आयुक्त एस. राजलिंगम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । बैठक को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब कृषि विकसित होगी, किसान समृद्ध होगा और हमारी मिट्टी स्वस्थ एवं उत्पादक बनी रहेगी । उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मृदा उर्वरता में गिरावट, कार्बनिक पदार्थों की कमी, उर्वरकों का असंतुलित उपयोग, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, भूजल स्तर में गिरावट तथा जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ कृषि के समक्ष गंभीर चिंता का विषय हैं । इन चुनौतियों का समाधान वैज्ञानिक कृषि, मृदा परीक्षण आधारित पोषण प्रबंधन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में निहित है । डॉ. कुमार ने कहा कि किसानों को उर्वरकों के विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग के लिए 4आर सिद्धांत—सही स्रोत, सही मात्रा, सही समय तथा सही विधि को अपनाना होगा । इससे उत्पादन लागत कम होगी, पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ेगी तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा । उन्होंने बताया कि आईसीएआर-आईआईवीआर द्वारा 20 अप्रैल से 31 मई 2026 तक संचालित संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के अंतर्गत 21 वैज्ञानिक टीमों ने 23 गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए । इस दौरान 2,673 किसानों को प्रशिक्षण एवं परामर्श प्रदान किया गया, 197 प्रदर्शन लगाए गए तथा 387 हेक्टेयर क्षेत्र को आच्छादित किया गया । किसानों के बीच 500 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा एवं 400 लीटर सूक्ष्मजीवी कंसोर्टिया का वितरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 7.74 टन नाइट्रोजन, 7.74 टन फॉस्फोरस तथा 3.87 टन पोटाश की बचत संभव हुई । उन्होंने बताया कि भारत सरकार एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा संचालित खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत 15 जून 2026 तक पांच जनपदों में 36 खेत भ्रमण, 87 प्रदर्शन तथा किसानों के साथ व्यापक संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए । अभियान के माध्यम से 2,395 किसानों तक प्रत्यक्ष पहुंच बनाई गई तथा 415 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा एवं 430 लीटर सूक्ष्मजीवी कंसोर्टिया का वितरण किया गया । इससे लगभग 430 हेक्टेयर क्षेत्र में संतुलित पोषण प्रबंधन को बढ़ावा मिला तथा अनुमानित रूप से 8.60 टन नाइट्रोजन, 8.60 टन फॉस्फोरस और 4.30 टन पोटाश की बचत हुई, जो लगभग 18.7 टन यूरिया, 53.75 टन एसएसपी एवं 7.17 टन एमओपी के बराबर है । मुख्य अतिथि एस राजलिंगम, आयुक्त, वाराणसी मण्डल ने कहा कि खेत बचाओ अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की कृषि भूमि, मृदा स्वास्थ्य और भविष्य की खाद्य सुरक्षा को संरक्षित करने का राष्ट्रीय जन-आंदोलन है । उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने तथा जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के अधिकतम उपयोग का आह्वान किया । कार्यक्रम में केंद्र सरकार प्रतिनिधि कृषि विशेषज्ञ एवं विशिष्ठ अतिथि श्री गोपाल भाई सुतारिया, संस्थापक बंसी गीर गोशाला एवं गोतिर्थ विद्यापीठ, कर्णवती, अहमदाबाद ने बैठक में किसानों एवं कृषक उत्पादक संगठनों से बात करते हुए कहा की भारत की प्राचीन गो-संस्कृति के पुनारुध्हार करना होगा | वे एक ऐसे भविष्य की कल्पना करते है जहाँ गोमाता जीवन की सभी गतिविधियों के केंद्र में हों | गो आधारित आयुर्वेद, गो आधारित कृषि और गो आधारित शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किये है | आज बंशी गीर गोशाला राष्ट्र में बड़े बदलाव लाने का प्रयास कर रही है और इस अभियान में बड़ी संख्या में संत महात्मा, गो भक्त, वैदिकविद्वान, कृषिवैज्ञानिक, आयुर्वेदाचार्य और किसान संघटन हृदय से जुड़े है | कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की भूमिका पर विशेष चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एफपीओ किसानों को गुणवत्तायुक्त कृषि आदान उपलब्ध कराने, सामूहिक विपणन, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण तथा आधुनिक तकनीकों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं । उन्होंने ने कहा की खेत के मेड पर नीम का पेड़ , नैपियर घास एवं चरणवध्य तरीके से प्राकृतिक खेती करके कई गुना उत्पादन, उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है | कई किसानों की सफलता की कहानी भी साझा किया | वहीँ डॉ योगेश गोंकर ने कहा की प्राकृतिक खेती को बड़े स्तर पर अपनाने तथा जैविक उत्पादों को बाजार से जोड़ने में भी एफपीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है । बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्री प्रखर कुमार सिंह ने प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, पोषण सुरक्षा, महिला एवं युवा किसानों की भागीदारी, सब्जी आधारित उद्यमिता तथा किसानों की आय वृद्धि के विभिन्न आयामों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया । प्रगतिशील किसान पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह , कृषि विशेषज्ञ डॉ सी पी श्रीवास्तव, उप निदेशक कृषि अमित कुमार जायसवाल, जिला कृषि अधिकारी संगम मौर्या एवं जिला उद्यान अधिकारी सुभास कुमार समेत उपस्थित प्रतिनिधियों ने खेत बचाओ अभियान को जन-आंदोलन बनाने, प्रत्येक किसान को मृदा परीक्षण से जोड़ने तथा संतुलित उर्वरक उपयोग को ग्राम स्तर तक पहुंचाने का संकल्प लिया । कार्यक्रम में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वाराणसी जनपद के 20 से अधिक एफपीओ प्रतिनिधि, 650 से अधिक किसान एवं वैज्ञानिक एवं मीडिया प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे । कार्यक्रम संचालन डॉ नीरज सिंह ने किया सभी प्रतिभागियों ने स्वस्थ मिट्टी – स्वस्थ फसल – स्वस्थ किसान – समृद्ध भारत के संकल्प के साथ कृषि के सतत विकास हेतु मिलकर कार्य करने का आह्वान किया । डॉ नरसिंह राम /15 जून2026