ईरान और अमेरिका के बीच शांतिवार्ता सफल हुई, अब शुक्रवार अर्थात जुम्मे के दिन समझौते पर हस्ताक्षर होने की बात कही जा रही है। इस समझौते को लेकर सारी दुनिया के देशों में एक सुखद प्रतिक्रिया देखने को मिली है। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की प्रतिक्रिया इस समझौते को लेकर ना वाली है। जिसके कारण ईरान और अमेरिका के बीच जो समझौता हुआ है उस पर हस्ताक्षर होने के पहले ही विवादों में फंस गया है। ऐसा लगता है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर इन दिनों शनि, राहु और केतु की क्रुद्ध दृष्टि है, जिसके कारण वह जो सोचते हैं ठीक उसके विपरीत होता है। समय और काल का प्रभाव पूरे ब्रह्मांड में रहता है, यही कारण है दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति को यह दिन देखना पड़ रहे हैं। वह ईरान के साथ युद्ध से बाहर निकलने के लिए अभी तक कई प्रयास कर चुके हैं। 40 बार से अधिक दफा झूठ बोल चुके हैं। उसके बाद भी वह इस युद्ध की विभीषिका से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। हाल ही में जी7 के सम्मेलन में भी उन्हें अपने सहयोगी देशों से सहयोग नहीं मिला, जिसकी वह आशा करके जी7 के सम्मेलन में गए थे। जिस तरह से निकाह में लड़की से पूछा जाता है कि तुम निकाह के लिए राजी हो या नहीं, इस अवसर पर काजी उपस्थित रहता है लड़की यदि हां कर देती है, इसके बाद काजी साहब निकाह की रस्म अदा करते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समझौते पर इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू हां नहीं कर पाए हैं। यही वजह है कि शांति समझौते को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जो प्रयास किए गए थे वह सब निष्फल होते हुए नजर आ रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री ने कहा कि इजरायल स्वतंत्र राष्ट्र है इस पर यह समझौता लागू नहीं किया जा सकता है। इजराइल अमेरिका का गुलाम नहीं है। ऐसा कहकर उन्होंने अपनी तीव्र प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से जाहिर कर दी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रह दशा इन दिनों बड़ी खराब चल रही है। उनके साथ उनके ही विश्वासपात्र लोग विश्वासघात कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में डोनाल्ड ट्रंप समझ नहीं पा रहे हैं वह करें तो क्या करें। ईरान जैसा देश जिसके ऊपर अमेरिका और यूरोप के देशों ने पिछले 47 वर्षों से तरह-तरह के प्रतिबंध लगा रखे थे ईरान हर प्रतिबंध को झेल रहा था। उसने कभी किसी के ऊपर, कोई हमला नहीं किया। वह अमेरिका के खिलाफ ऐसा लड़ेगा यह तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया के किसी भी देश ने नहीं सोचा था। फरवरी माह से जो युद्ध शुरू हुआ था उसकी परिणति इस रूप में होगी यह ना तो अमेरिका ने सोचा था ना ही इजराइल ने सोचा था। इस सारे विवाद में ईरान की जैसे लॉटरी खुल गई है। ईरान की जो संपत्तियां जप्त की गईं थीं, ईरान के जो पैसे जप्त किए गए थे, उन सबको लौटाने की जिम्मेदारी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खाड़ी के देशों पर डालना चाहते हैं। अरब देशों की रक्षा अमेरिका नहीं कर पाया, अब सब ईरान के साथ सहयोग करके अपने आप को बचाने में लगे हुए हैं। कहा तो यह भी जा रहा है, कि यूएई ने भी ईरान के साथ समझौता कर लिया है। ऐसी स्थिति में ईरान की किस्मत पलट गई है। पिछले 4 दशकों से ईरान की जनता ने जो दुख भोगे थे वह अब खत्म होने की कगार पर आ गए हैं। ईरान के अच्छे दिन अब शुरू हुए हैं। इजराइल के खराब दिन अब शुरू होना प्रारंभ हो गए हैं। इस युद्ध में इजराइल में जो बर्बादी हुई है वह किसी से छिपी हुई नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू ने जो सोचा था। ठीक उसके विपरीत परिणाम देखने को दोनों को मिल रहे हैं। अमेरिका और इजराइल दोनों की मति खराब हो गई है, जब उन्हें मिलकर निर्णय करना था उस समय वह एक दूसरे के खिलाफ खड़े हुए हैं। इससे दोनों को नुकसान होना तय है। फिलिस्तीन और गाजा में इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहु ने जो नरसंहार किया था। महिलाओं और बच्चों को भी बेरहमी से मारा गया था। लगता है उन सभी की बददुआ डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहु को लग रही है। उनके भगवान भी अब उनकी मदद नहीं कर रहे हैं। लगता है जो कर्म किए थे अब उनके फल मिलना दोनों को शुरू हो गए हैं। बहरहाल ईरान के जहां अच्छे दिन शुरू होते हुए दिख रहे हैं वही सारी दुनिया को इस लड़ाई से एक संदेश भी मिल रहा है अति सर्वत्र वर्जयेत। कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों ना हो जब वह अहंकारी हो जाता है, जनता को कष्ट और दुख देने लगता है, अपने आप को भाग्य विधाता मानने लगता है तब जो हाल वर्तमान में डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के हो रहे हैं वही होता है। भारत में भी इसके सेकडो उदाहरण है। अभी ऐसा लग रहा था कि युद्ध समाप्त हो गया है सारी दुनिया में जो भय और आतंक फैला हुआ था उससे मुक्ति मिलेगी, लेकिन लगता है कि अभी और भी नुकसान होना है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यही आशंका व्यक्त की जा रही है। ईएमएस / 16 जून 26