राष्ट्रीय
16-Jun-2026


एनडीए में शामिल होने की तैयारी कोलकाता,(ईएमएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून से बचने और अपनी राजनीतिक दिशा बदलने के लिए बड़ा मास्टरस्ट्रोक चला है। इन सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया है, जिसकी कमान अब टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की कभी करीबी रहीं काकोली घोष दस्तीदार के हाथों में है। इस कदम के साथ ही यह गुट अब बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की तैयारी में है। यह राजनीतिक तख्तापलट एक गोपनीय सहमति से हुआ है। काकोली घोष को एनसीपीआई का अध्यक्ष चुने जाने से दो दिन पहले पार्टी की तत्कालीन अध्यक्ष शेवली कुंडू ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद, 30 मई को चार बार की सांसद काकोली घोष को आधिकारिक तौर पर एनसीपीआई का नया अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद इन 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें अनजान पार्टी के साथ अपने विलय की आधिकारिक जानकारी दी, इसके बाद से घटनाक्रम राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। टीएमसी के भीतर इस उथल-पुथल की जड़ पार्टी के अघोषित उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी को माना जा रहा है। बागी सांसदों का आरोप है कि अभिषेक का अहंकारी रवैया और पार्टी के आंतरिक ढांचे की लगातार अनदेखी ही बड़ी बगावत की मुख्य वजह बनी। इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने परदे के पीछे से अहम भूमिका निभाई। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और वरिष्ठ सांसद निशिकांत दुबे जैसे नेताओं ने बागी गुट के साथ लगातार संपर्क बनाकर उनकी आगे की रणनीति तय करने में मदद की। यहाँ तक कि कई महत्वपूर्ण बैठकें केंद्रीय मंत्री यादव के आवास पर ही हुईं। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को दिए पत्र में खुद को बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बताकर सत्ताधारी गठबंधन में सीटें आवंटित करने की मांग की है। बात दें कि नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) को जनवरी 2023 में राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता मिली थी। पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले से संचालित यह एक अनजान राजनीतिक दल है, जिसने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में 4 उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें से एक को सबसे ज्यादा महज 536 वोट ही मिल सके थे। छह बार के सांसद और बागियों में सबसे वरिष्ठ सदस्य सुदीप बंद्योपाध्याय भी हाल ही में गुट में शामिल हुए हैं। यदि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला विलय को मंजूरी देते हैं, तब यह भारतीय राजनीति में एक बड़ा उलटफेर होगा। कल तक संसद या किसी भी राज्य विधानसभा में एक भी सदस्य न रखने वाली एनसीपीआई रातों-रात लोकसभा की पाँचवीं सबसे बड़ी पार्टी और सत्ताधारी एनडीए का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल बनेगी। आशीष दुबे / 16 जून 2026