राष्ट्रीय
16-Jun-2026
...


भागवत का पलटवार, आरएसएस किसी सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं बेंगलुरु (ईएमएस)। कर्नाटक सरकार में गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उसके प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता खड़गे ने आरएसएस को सांस्कृतिक संगठन मानने के साथ ही उसकी राजनीतिक जवाबदेही, पारदर्शिता और कानूनी रजिस्ट्रेशन की मांग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख भागवत का जो वीडियो उनके पत्र के जवाब के रूप में सामने आया है, वह गलत है, क्योंकि उन्होंने अपना पत्र 15 जून को भेजा था, जबकि भागवत की वह बातचीत 13-14 जून की थी। कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा कि आरएसएस को सांस्कृतिक संगठन होने का पूरा अधिकार है, लेकिन वह एक ही समय में व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर दावा नहीं कर सकता कि उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और इसकारण जनता के प्रति उसकी कोई जवाबदेही नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा खुद आरएसएस को अपना वैचारिक जनक मानती है। गृह मंत्री खड़गे ने आरएसएस के देश-विदेश में 2500 से अधिक संबद्ध संगठनों के नेटवर्क के माध्यम से चंदा मिलने और विभिन्न राजधानियों में मुख्यालय चलाने पर सवाल उठाए। उन्होंने उल्लेख किया कि आरएसएस प्रमुख को एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइसेंस प्रोटोकॉल मिलता है और अन्य पदाधिकारियों को भी करदाताओं के पैसे से सुरक्षा मिलती है। प्रियांक खड़गे ने कहा कि जनता को यह जानने का हक है कि क्या आरएसएस उन कानूनी मानकों का पालन करता है, जिनकी उम्मीद बाकी सभी संगठनों से होती है, और औपचारिक कानूनी मान्यता मिलने से यह विरोधाभास समाप्त हो जाएगा। उन्होंने आरएसएस के तर्क को खारिज किया कि किसी धर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं होता, इसलिए आरएसएस को भी रजिस्टर करने की जरूरत नहीं है। खड़गे ने कहा कि आरएसएस किसी धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करता और मात्र 100 साल पुराना संगठन है। अंत में, उन्होंने कहा, मुझे आरएसएस की किसी भी गतिविधि से आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें पारदर्शिता बनाए रखना चाहिए। वहीं संघ प्रमुख भागवत का कहना कि आरएसएस किसी सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है, चिंताजनक है। संवैधानिक लोकतंत्र में किसी भी संस्था को विशेषाधिकार नहीं मिलता। अहंकार छोड़िए, कानून का पालन कीजिए। आशीष दुबे / 16 जून 2026