16-Jun-2026


मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन निरस्त होना लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय - मानक पटेल दमोह (ईएमएस)! मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी आज पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर पत्रकार वार्ताओं के माध्यम से देश और प्रदेश की जनता के सामने एक अत्यंत गंभीर विषय रख रही है। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सुश्री मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना केवल एक उम्मीदवार के साथ अन्याय का मामला नहीं, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया, निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर प्रहार है। कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है, कि जिस प्रकार की आपत्तियों एवं व्याख्यायों के आधार पर मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन निस्त किया गया, उसने पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिये है। प्रदेश कांग्रेसअध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस महासचिव एवं म.प्र. प्रभारी हरीश चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सांसद विवेक तन्खा तथा वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी सहित कांग्रेस नेतृत्व ने लगातार यह प्रश्न उठाया है, कि क्या चुनावी प्रक्रिया कानून के अनुरूप संचालित होगी या राजनीतिक चुनावों के अनुरूप। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि जिस निजी परिवाद का उल्लेख किया गया है, उसमे मीनाक्षी नटराजन जी को अभियुक्त नहीं बल्कि प्रतिवादी के रूप में दर्शाया गया है। प्रतिवादी और अभियुक्त की कानूनी स्थिति अलग-अलग होती है । दोनो को समान मानकर की गई व्याख्या गंभीर कानूनी प्रश्न उत्पन्न करती है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33 ए और फॉर्म - 26 की व्यवस्था का उद्देश्य उन आपराधिक मामलों की जानकारी प्राप्त करना है, जिनमें उम्मीदवार के विरूद्ध विधिवत आपराधिक कार्यवाही चल रही हो तथा कानून के अनुरूप आवश्यक प्रकटीकरण अपेक्षित हो। कांग्रेस का मत है, कि जिस आधार को नामांकन निरस्त करने का कारण बनाया गया, वह इन प्रावधानों की भावना और व्याख्या से मेल नहीं खाता। यदि किसी उम्मीदवार के नामांकन को ऐसे आधारो पर निरस्त किया जाता है, जिनकी स्पष्ट अपेक्षा नामांकन प्रपत्र में नहीं है, तो यह भविष्य में किसी भी उम्मीदवार के लिये अनिश्चितता और मनमानी की स्थिति पैदा कर सकता है। लोकतंत्र की आत्मा प्रतिस्पर्धी और निष्पक्ष चुनाव में निहित है। यदि विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को तकनीकी और विवादित आधार पर चुनावी मैदान से बाहर किया जाने लगे, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वस्नीयता पर गंभीर आघात पहुंचेगा।कांग्रेस पार्टी यह भी कहना चाहती है, कि लोकतंत्र केवल मतदान की प्रक्रिया का नाम नहीं है। लोकतंत्र का अर्थ है, सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को समान अवसर, निष्पक्ष व्यवहार और कानून के समक्ष समान संरक्षण प्राप्त होना। आज देश के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है, कि क्या चुनावी संस्थाओं की भूमिका लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने की होगी या विपक्ष की आवाज को सीमित करने की कांग्रेस पार्टी मानती है, कि मीनाक्षी नटराजन की जैसी साफ-सुथरी छवि, वैचारिक प्रतिवद्धता और जनसेवा के लिये समर्पित नेता को जबरन चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरूद्ध है। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं है। यह मामला संविधान की भावना, निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रदेश की आम जनता जनार्दन को आश्वस्त करती है कि संविधान, लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की रक्षा के लिये कांग्रेस पार्टी का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। लोकतंत्र केवल चुनाव से नहीं चलता, बल्कि निष्पक्ष चुनाव से चलता है। ईएमएस/मोहने/ 16 जून 2026