राज्य
04-Oct-2025
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-छिंदवाड़ा की एक और बच्ची की इलाज के दौरान नागपुर में गई जान, 11 पर पहुंचा मौत आंकड़ा -कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप मप्र में बैन - प्रभावित परिवारों को प्रति दिवंगत 4-4 लाख रुपए की सहायता राशि देगी मप्र सरकार छिंदवाड़ा/भोपाल (ईएमएस)। किडनी फेल होने से छिदवाड़ा की एक और बच्ची की मौत हो गई है। नागपुर में पिछले एक सप्ताह से योगिता ठाकरे का इलाज चल रहा था। वह भी शनिवार को जिंदगी की जंग हार गई। अब तक छिंदवाड़ा के 11 बच्चों की मौत किडनी फेल होने से हो गई है। इधर, तमिलनाडु के बाद मध्यप्रदेश और फिर केरल में भी कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस कफ सिरप को बैन कर दिया गया है। इन्हीं सिरप की वजह से छिंदवाड़ा में 11 बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हुई है। सीएम मोहन यादव ने एक्स पर पोस्ट कर ये जानकारी दी है। स्थानीय डॉक्टर की सलाह पर बच्चों को कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस कफ सिरप देने की बात सामने आई थी। बच्चों की मौत के बाद जांच के लिए तीन टीमें बनाई गई हैं। अब एसआईटी बनाकर राज्य स्तर पर जांच की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों को प्रति दिवंगत 4-4 लाख रुपए की सहायता राशि देने के निर्देश दिए गए हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव ने एक्स पर लिखा कि छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्यप्रदेश में बैन कर दिया है। सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है। सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है। इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था। शनिवार सुबह जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया गया है। वहीं, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त टीम ने घटनास्थल का दौरा किया है। टीम ने राज्य के अफसरों के साथ मिलकर कफ सिरप समेत कुल 6 सैंपल लिए। जांच रिपोर्ट में इनमें से किसी भी सैंपल में डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) या एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) नहीं पाया गया। डिफ्रॉस्ट सिरप भी बाजार से वापस बुलाई छिंदवाड़ा में मासूमों की मौत के बाद इंदौर में बनी डिफ्रॉस्ट सिरप को बाजार से वापस बुलाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इंदौर की आर्क फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के खिलाफ कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर डिफ्रॉस्ट सिरप बैच नं. 11198 को बाजार से रिकॉल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, औषधि महानियंत्रक (भारत सरकार) और संबंधित राज्यों हिमाचल प्रदेश एवं तमिलनाडु के औषधि नियंत्रकों को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। गंभीर अनियमितताएं मिली 26 से 28 सितंबर 2025 तक छिंदवाड़ा जिले में औषधि निरीक्षकों की टीम ने औषधि विक्रय संस्थानों और अस्पतालों का संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। टीम ने कुल 19 औषधि नमूने परीक्षण के लिए शासकीय प्रयोगशालाओं को भेजे हैं। अब तक राज्य के पास केवल 9 की रिपोर्ट आई है, जबकि 10 सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। तमिलनाडु सरकार की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप में 48.6 प्रतिशत डायएथिलीन ग्लायकॉल की मिलावट थी। जो एक जहरीला केमिकल है। वहीं, संदिग्ध नेक्स्ट्रो-डीएस कफ सिरप की रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है। यह सिरप हिमाचल प्रदेश के सोलन (बद्दी) की कंपनी से आई है, जिसकी जांच मध्यप्रदेश और हिमाचल दोनों जगह चल रही है। दो और केमिकल को लेकर अलर्ट राज्य सरकार ने सभी औषधि निर्माताओं, निरीक्षकों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और मेडिकल कॉलेजों के डीन को एडवाइजरी जारी की है। इसमें क्लोरफेनिरामाइन मलेट और फिनाइलफ्रिन एचसीएल जैसे रसायनों के उपयोग को लेकर विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। ये दोनों खांसी-जुकाम की दवाओं में आम तौर पर पाए जाने वाले सक्रिय तत्व हैं। यह संयोजन उपयोगी तो है, लेकिन छोटे बच्चों या बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल पर खतरनाक साबित हो सकता है। 50-50 लाख का मुआवजा दे सरकार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शनिवार को एक्स पर लिखा है कि जहरीला कफ सिरप पीने से अब तक छिंदवाड़ा में 10 बच्चों की मौत हो चुकी है। दुख की इस घड़ी में मेरी भावनाएं पीडि़त परिवारों के साथ हैं। यह याद रखना होगा कि यह महज दुर्घटना नहीं बल्कि मानव निर्मित त्रासदी है। मैं मध्यप्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि एक-एक मृत बच्चे के परिजनों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। मनाही के बावजुद दी गई दवा साल 2023 में डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विस ने सभी राज्यों को पत्र भेजकर बताया था कि इस फॉर्मूले की दवा 4 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जानी चाहिए। इसके बावजूद छिंदवाड़ा के डॉक्टरों द्वारा यह दवा लिखी गई। जिन 9 मासूमों की मौत हुई है, उनमें से 7 की उम्र 4 साल या उससे कम है। जबकि 2 बच्चे 5 साल के ही हैं। खुलासा हुआ है कि जो कोल्ड्रिफ सिरप सप्लाई की गई थी, उन्हें जबलपुर से भेजा गया था। हालात की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर कलेक्टर ने पहले ही कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप पर बैन लगा दिया था। छिंदवाड़ा में श्री सन फार्मा कंपनी के मैनेजर की डिमांड पर महाकौशल डीलर कटारिया फार्मास्यूटिकल से इस कफ सिरप की सप्लाई होती थी। खास बात यह है कि कोल्ड्रिफ सिरप के लिए पूरे महाकौशल में सिर्फ छिंदवाड़ा से ही डिमांड आती थी। 660 बोतल सिरप मंगवाईं, 594 छिंदवाड़ा भेजी गईं महाकौशल डीलर कटारिया फार्मास्यूटिकल ने सितंबर में चेन्नई की कंपनी श्री सन फार्मा से कोल्ड्रिफ सिरप की 660 बोतल मंगवाई थी। इनमें से 594 छिंदवाड़ा की तीन अलग-अलग मेडिकल शॉप आयुष फार्मा, न्यू अपना फार्मा और जैन मेडिकल एवं जनरल स्टोर में सप्लाई की गई। बाकी 66 सिरप डीलर ने अपने ऑफिस में रख ली थी। ड्रग कंट्रोलर के निर्देश पर जबलपुर ड्रग इंस्पेक्टर शरद कुमार जैन ने शुक्रवार को नौदरा ब्रिज स्थित कटारिया फार्मास्यूटिकल ऑफिस में जांच की है। शरद कुमार जैन ने बताया कि श्री सन फार्मा कंपनी की डीलरशिप महाकौशल में सिर्फ एक ही है। इसी कंपनी की सिरप कोल्ड्रिफ मध्यप्रदेश में कहीं भी सप्लाई नहीं होती। छिंदवाड़ा में भी यह सिरप सिर्फ 3 मेडिकल शॉप पर ही भेजी जाती थी।