:: ज़फ़र अंसारी के दुर्लभ संग्रह में आज़ादी के दौर के 20 ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड, ऐतिहासिक बटन और मैडम कामा के ध्वज की प्रतिकृति शामिल :: इंदौर (ईएमएस)। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने की ऐतिहासिक कड़ी में, इंदौर के संग्रहकर्ता व इतिहासकार ज़फ़र अंसारी (53) ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने वंदे मातरम् से जुड़ी अपनी वर्षों की संजोई गई दुर्लभ विरासत का एक हिस्सा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मानपूर्वक भेजा है। यह संग्रह राष्ट्रीय गीत के गौरव और स्वाधीनता आंदोलन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। ज़फ़र अंसारी ने पिछले तीन दशकों में ये अमूल्य वस्तुएँ एकत्र की हैं। उनके खजाने में बंगाली, हिंदी और मराठी संस्करणों सहित वंदे मातरम् के 20 दुर्लभ ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड हैं, जो इस कालजयी रचना के व्यापक सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाते हैं। संग्रह में सबसे खास वे ऐतिहासिक धातु के बटन हैं, जिन्हें स्वतंत्रता सेनानी खादी की जैकेटों पर पहना करते थे। इन बटनों पर हिंदी में वंदे मातरम् शब्द के साथ तिरंगा और चरखा भी उत्कीर्ण है। इसके अतिरिक्त, उनके पास मैडम भीकाजी कामा द्वारा 1907 में फहराए गए ध्वज की 1937 में छपी कागजी प्रतिकृति भी है, जिसके केंद्र में वंदे मातरम् लिखा है। ज़फ़र अंसारी ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति और आज़ादी की प्रेरणा देने के लिए इसकी प्रतिकृतियाँ वितरित की गई थीं। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 7 नवंबर 1875 को रचित यह गीत, जो उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ था, देश की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। ज़फ़र अंसारी का यह प्रयास भावी पीढ़ी को इतिहास की इस गौरवशाली कड़ी से जोड़ने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। प्रकाश/10 नवंबर 2025