लेख
11-Dec-2025
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संसद में यदि बंदे की चर्चा जोरों पर है क्योंकि इसकेसाल 2025 भारत के राष्ट्रीय गीत, वंदे मातरम के लिए एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक मील का पत्थर होगा, क्योंकि इसके पहले पब्लिकेशन के 150 साल पूरे हो रहे हैं। बंदे मातरम पर बोलने से कोई आपत्ति करता पर तूल देना ठीक नहीँ है बंदे मातरम एक राष्ट्रगान है जिसपर संसद में खुब चर्चा हुई कुछ मुस्लिम सांसद की नारजगी हुई इसे तूल मैं भी उसके जगह जय श्री राम बोलता हूँ तो क्या होगा क्योंकि जब देश में ही मिलावटी लोग हैं तो मेरा भगवान राम राष्ट्र से भी ऊपर है मैं भगवान राम को ही संसार का मालिक समझ कर उनका नाम लेता हूँ क्योंकि जब भगवान राम का अस्तित्व रहेगा तभी हम शांति और चैन से जी सकते हैं जब ऐ गान पहले से संसोधित हो गया तो मैं भगवान राम के अलावा किसी के सामने झुकना पसन्द नहीँ करूँगा क्योंकि मेरे संस्कार में ही वो हमेशा रहे हैं और अन्त में राम नाम सत्य होना ही है तो अभी ही ले लूँ यहीं हमारा धर्म और उनके मर्यादा का पालन करना कर्म है अब दोनों ही एक मतलब हो गए क्योंकि भगवान राम ही इस धरती में हमें हमेशा मानवता की रक्षा और देशद्रोही से लड़ना सिखाता है एक गाना खुब चला, मेरे रोम रोम में बसने वाले राम, जगत के स्वामी है अंतर्यामी मैं तुझसे क्या मांगू।।। किसी पर किसी वाक्य बोलने से क्या फर्क पड़ता है तेरा तुझको सौंप कर क्या लागे मेरा, वाणी वही बोले जो अंतरात्मा की आवाज़ कहती है अंतरात्मा दरअसल आत्मा, आंतरिक स्व (inner self), या आंतरिक स्व (inner self), या ज़मीर, जो सही और गलत की पहचान करने वाली आंतरिक आवाज या अंतःप्रज्ञा है, जो हमें नैतिक निर्णय लेने में मदद करती है; इसे आंतरिक स्व की ज्योति या आत्मा की आवाज़ भी कहा जाता है, जो हमारे अंतःकरण में विद्यमान होती है। यह हमारे मन और आत्मा का वह हिस्सा है जो हमें सही राह दिखाता है, भले ही बाहरी नियम या तर्क सीमित हों अतः जो अंतरात्मा की आवाज़ कहती है वही बोले इसलिए हमें पहले अपने अंदर झाँक कर देखना चाहिए मैं कितना सही हूँ आज अगर भारत माता की रक्षा के लिए हमें बलिदान देना पड़े तो क्या हम तैयार हैं।अतः देश के सेना ही हमारे असली नायक हैं जो देश की रक्षा के लिए जान की बाजी भी दे देते हैं अतः देशभक्त होना जरुरी है भाषा क़ोई विवाद नहीँ है राम यह शब्द दिखने में जितना सुंदर है उससे कहीं महत्वपूर्ण है इसका उच्चारण। राम भारत की आत्मा है जब ऐ समझ आएगी तभी देश के प्रति सेवा का भाव पैदा होगा।राम कहने मात्र से शरीर और मन में अलग ही तरह की प्रतिक्रिया होती है जो हमें आत्मिक शांति देती है।दरअसल हिन्दू की अंतिम विदाई में यानी शवयात्रा में ‘राम नाम सत्य है’ यह बोलकर मृतक को सुनाना नहीं होता है, बल्कि साथ में चल रहे परिजन, मित्र और वहां से गुजर रहे लोग इस तथ्य से परिचित हो जाएं कि राम का नाम ही सत्य है। साथ ही जब मनुष्य जब राम का नाम लेगा तभी उसकी सदगति होगी। इसलिए इसका मकसद यह कहकर परंपरा शुरू की गई थी कि मृतक के मरने के पीछे जब मनुष्य इतना लड़ते हैं, धर्म जाति पाती बड़ा छोटा के लिए वाद-विवाह करते हैं और अपनो से ही यश के कारण आपमें घमंड के कारण लड़ा करते हैं, लेकिन अन्य व्यक्ति को भी यह मालूम होना चाहिए कि राम का नाम सत्य है क्योंकि सबसे बड़ा घमंड जो रावण के पास आया उसको भगवान राम ने ही तोड़ा यानि जिसने इस धरती पर जन्म लिया, उसकी मृत्यु निश्चित है। इसलिए घमंड ना करें जीवन में मिल जुल कर रहे गरीबों की सेवा और सत्य की राह पर चले यही मान्यता है और इन्हीं सब कारणों की वजह से शवयात्रा में ‘राम नाम सत्य है’ बोलते हैं।इससे मृतक के आत्मा को शांति मिलती है शरीर मरता नहीँ है क्योंकि उसमें ऊर्जा है शिथिल होता है और ऊर्जा का पतन होने लगता है बाद में यही ऊर्जा प्राण के रूप में बाहर निकल जाती है और स्थूल से सूक्ष्म में रूपांतर हो जाता है और अनुभूति होती है और राम के राम की ध्वनि से उसमें प्रभु को यादकर अपनी जीवन में हुए गलत कर्म के लिए माफी मांगता है और इस तरह वह शांति की ओर अग्रसर होता है और कई योनियों में जन्म लेने के बाद तब कहीं पुनः मनुष्य में जन्म मिलता है इसका कारण यह है की आप अपने शरीर की ऊर्जा को पहले ही कामवासना से नकारात्मक कर देते है और जब मोह टूटटी है तो आत्मा को शांति मिलती है जैसे किसी भी क्षेत्र में पारंगत होने के लिए प्रैक्टिस करना जरुरी है तब आप उसमें आप दक्ष होते है इसलिए हर समय शांति से रहना कम बोलना और समय पर सटीक बोलना उस परमात्मा भगवान राम को हमेशा याद करते रहने से आप में मौत का डर ख़त्म हो जायेगा और लोभ लालच में कामवासना से मुक़्त होकर जब शांति की ओर अग्रसर होंगे तो सच सामने आएगा कि मृत होना एक दिन तय है इसलिए अपनी ऊर्जा सकारात्मक की ओर अग्रसर करें ज्यादा बोलने से आपकी ऊर्जा बेबजह नष्ट होती है जो आजकल संसद में वोट शुद्धिकरण पर चर्चा हो रही है घुसपैठिये, मतदाता सूची का शुद्धिकरण जरूरी है और उसी का नाम एस आई आर है मुख्य विपक्षी पार्टी का एक के बाद एक चुनाव हारने का कारण इवीएम या वोट और ना जाने क्या क्या बहस हो रही है इसका मतलब यह है की पक्ष विपक्ष दोनों को आपकी नहीँ अपनी चिंता ज्यादा दिखाई दे रही है संसद में सही गलत पर तर्क वितर्क से कुछ नहीँ मिलेगा यदि चुनाव जितना है तो जनता के लिए काम करना होगा, पहले विपक्ष बिलकुल कमजोर या नहीँ था लेकिन पहले जो संसद में सोते थे आज सत्ता पक्ष को यह ध्यान देना जरुरी है कि आखिर विपक्ष में इतना ताकत कहाँ से आई वो भी उसी चुनाव प्रक्रिया से गुजर चूंके होंगे और अब सत्ता पक्ष को शांत रह कर काम करने की ज्यादा जरुरत है जिस तरह विपक्ष मजबूत हुआ है तो जनता के बल पर ही जीता, घुसपैठ कितना होगा इधर तो नजर नहीँ आ रहा है उसकी संख्या उतनी नहीँ है कि सरकार को बना या बिगाड़ दे जो सही में वोटर है वो तो पुरी तरह जाते ही नहीँ है कभी सुना है 90 परसेंट मतदान हुए हैँ अतः ऐ सब व्यर्थ की बातें हैँ काम की बातें करना ज्यादा जरुरी है जो देश के गरीबों के कल्याण के लिए हो अगर घुसपैठिये आये तो ऐ भी प्रशासन की लापरवाही होगी क्योंकि क्या अपने बाउंड्री को पूरा सील किया है जैसे बाकी के देश ने किया है एक ऐसा दिवार बना दिया है जिस पर जाना नामुमकिन है अमेरिका ने तो अमेरिका और मेक्सिको के बीच सीमा करीब 2000 मील (लगभग 3200 किमी) लंबी है। अमेरिका में अवैध घुसपैठ के लिए ये रास्ता बदनाम रहा है। दीवार बनने से पहले इस पर बाड़ लगी हुई थी। 2016 में ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान यहां पर दीवार बनाने का वादा किया। जनवरी 2017 में जब वह अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने इस वादे को निभाने पर काम शुरु करवाया। 2017 से लेकर 2021 तक करीब 727 किलोमीटर लंबी दीवार बनाई गई। इसे ट्रंप वॉल भी कहा जाता है। अतः इसपर चर्चा करना जरुरी है क्योंकि आए दिन कहीं पाकिस्तान से सटे इलाके में हमारे जवान मरते हैँ कहीं चीन से अब तो बांग्लादेश भी उसी राह पर चल निकला है अतः जब सीमा सुरक्षा बल है तो सवाल ऐ है कि घुसपैठ आखिर हो कैसे जा रहा है जो हमारी एकता और संप्रभुता पर खतरा है ऐ सिर्फ पश्चिम बंगाल की समस्या नहीँ है ऐ तो उत्तर प्रदेश में भी आ गए और योगी जी के डिटेनशन सेंटर के डर से लापता हो रहे हैँ अतः वाद विवाद मुद्दे जो देशहित में हो यही करना चाहिए अनर्थ वार्ता से बचना चाहिए संसद क़ोई अखाड़ा तो है नहीँ अपनी बात रखने का अधिकार सबको है लेकिन जो सार्थक हो चुनाव में हार मिली है तो उस पर पार्टी को अपनी छवि सुधार करना चाहिए ईवीएम क़ोई मुदा नहीँ है क्योंकि जब वोटिंग होती है तो विपक्ष के तरफ से भी एजेंट होता है इसका मतलब ऐ हुआ कि एजेंट ही उससे मिल गया ऐसा नहीँ है चुनाव एक लोकतान्त्रिक प्रक्रिया है और वीवीपैट के आने के बाद तो पारदर्शिता बढ़ी है ना जाने कितने लोग इसमें कड़ी मेहनत करते है जब इलेक्शन ड्यूटी होता है और काउंटिंग में वही फॉर्म एजेंट काउंटर पर ले कर जाता है जो चुनाव के समय का डाटा होता है अतः इस पर सवाल करना व्यर्थ है। ईएमएस / 11 दिसम्बर 25