क्षेत्रीय
02-Jan-2026


छिंदवाड़ा जबलपुर (ईएमएस)। जिले में नियमों की धज्जियां उड़ाकर दवा दुकानें किराए के लाइसेंस पर संचालित की जा रही हैं। जबकि नियमानुसार फार्मासिस्ट का लाइसेंस जिस व्यक्ति के नाम पर होता है वही दुकान पर दवाइयों का कारोबार कर सकता है। लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और खाद्य औषधि प्रशासन के अधिकारी की अनदेखी के चलते कुछ मेडिकल स्टोर का संचालन किराए के फार्मासिस्ट लाइसेंस से किया जा रहा है। नियम के मुताबिक फार्मासिस्ट होल्डर को ही मेडीकल स्टोर मे दवा बिक्री करने का अधिकार होता है लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही है। मेडिकल व्यवसाय में अच्छी आमदनी को देखते हुए लोग किराये के लाइसेंस लाइसेंस लेकर धड़ल्ले से मेडिकल चला रहे हंै। मेडिकल स्टोर की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। दुकानों से दवा खरीदकर उपयोग मे लाना खतरे से खाली नहीं है। नियम यह है कि फार्मासिस्ट होल्डर भले ही अपने मेडिकल पर नौकर रख सकता है लेकिन दवा की बिक्री अपनी देखरेख में कराएगा। यहां तो फार्मासिस्ट का नाम कागजों मे दिखाकर मेडिकल स्टोर कोई और चलाता है लेकिन जुगाड़ के फार्मासिस्ट से दवा बेचकर मुनाफा कमाने वालों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नही होती है। औषधि निरीक्षक कभी-कभार मेडिकल स्टोर पर जांच पड़ताल करने पहुंच जाते हैं जबकि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से लोंगों के जान पर बन आयी है। लोग बाजार से ही दबा खरीदने को मजबूर है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी या ड्रग इंस्पेक्टर को जनहित से कोई लेना-देना नहीं है। जिससे ऐसे मेडिकल स्टोरों की जांच-पड़ताल नहीं की जाती है। इससे मेडिकल संचालकों के हौंसले और बुलंद है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों मे इलाज कराने पहुंचने वाले लोंगों को यह भी पता नहीं होता है कौन सी दवा किस कीमत की है। यह है औषधी एवं प्रसाधन अधिनियम 1940 औषधियों तथा प्रसाधनों के निर्माण, बिक्री तथा समवितरण को विनियमित करता है। इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति या फर्म राज्य सरकार की ओर से जारी लाइसेंस के बिना औषधियों का स्टॉक, बिक्री या वितरण नहीं कर सकता। ग्राहक को बेची गई प्रत्येक दवा का कैश मेमो देना अनिवार्य कानून है। स्टोर के लिए ड्रग लाइसेंस अनिवार्य है। दवाइयों के फुटकर विक्रेता जिसने फार्मेसी में कोई डिग्री या डिप्लोमा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से लिया हो उसे आरडीएल लाइसेंस जारी किया जाता है। स्टोर जब तक खुला रहेगा रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट का मौजूद रहना अनिवार्य है। २० फीसदी दुकानें किराए पर शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न फार्मासिस्ट के पंजीयन व लाइसेंस लगे हुए हैं। जो पंजीयन फार्मेसी कांउसिल ऑफ इंडिया ने जारी किए हैं। जानकारी के मुताबिक जिले भर में ७०० से ८०० दवा दुकानें हैं, इन दुकानों के लाइसेंसों में से करीब २० प्रतिशत दवा दुकानदार अन्य व्यक्तियों के लायसेंस पर दुकान संचालित कर रहे हैं। इनका कहना है... मेरी जानकारी में खुद के लायसेंस पर दुकान संचालित हो रही है। लगातार मॉनिटिरिंग की जा रही है इसके बावजूद भी दुकानदार किसी अन्य के लायसेंस पर दुकान चला रहे हैं तो इसकी जांच की जाएगी। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्वपनिल शर्मा औषधि निरीक्षक छिंदवाड़ा ईएमएस / 02 जनवरी 2026