* भक्त प्रह्लाद के चरित्र ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर * अधर्म पर धर्म की विजय का हुआ दिव्य उद्घोष कोरबा (ईएमएस) श्रीधाम वृंदावन स्थित फोगला आश्रम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के तृतीय दिवस का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और भाव-विभोर वातावरण में संपन्न हुआ। कथा व्यास श्रीहित ललितवल्लभ नागर की अमृतमयी वाणी से आश्रम परिसर दिनभर “नारायण-नारायण” और “राधे-राधे” के पावन उद्घोष से गुंजायमान रहा। तीसरे दिन की कथा में भक्त प्रह्लाद के दिव्य चरित्र का सजीव, मार्मिक और प्रेरणादायी वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास श्रीहित ललितवल्लभ नागर ने कहा कि भक्त प्रह्लाद का जीवन समस्त मानवता के लिए अटूट आस्था, धैर्य, सत्यनिष्ठा और ईश्वर-भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने विस्तार से वर्णन किया कि किस प्रकार हिरण्यकशिपु जैसे अत्याचारी पिता के कठोर अत्याचारों, यातनाओं और प्रलोभनों के बावजूद प्रह्लाद ने भगवान विष्णु में अपनी अडिग श्रद्धा बनाए रखी। आग, विष, पर्वत से गिराया जाना, सर्प-दंश आदि किसी भी कष्ट ने प्रह्लाद की भक्ति को डगमगाने नहीं दिया। कथा के दौरान नृसिंह अवतार का प्रसंग सुनाते हुए व्यासजी ने बताया कि जब अधर्म अपनी पराकाष्ठा पर पहुंचता है, तब ईश्वर स्वयं धर्म की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। भगवान नृसिंह का प्राकट्य इस सत्य का प्रतीक है कि ईश्वर भक्त की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। यह प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और वातावरण भक्ति-रस से सराबोर हो उठा। श्रीहित ललितवल्लभ नागर ने आगे कहा कि आज के युग में प्रह्लाद का चरित्र हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि मन में ईश्वर के प्रति सच्ची भक्ति और सत्य का मार्ग हो, तो अंततः विजय धर्म की ही होती है। उन्होंने माता-पिता, गुरु और समाज के प्रति कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए जीवन में संयम, करुणा और सेवा भाव को अपनाने का संदेश दिया। कथा के बीच-बीच में सुमधुर भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और जयकारों से पूरा आश्रम भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु झूमते-गाते हुए कथा-श्रवण करते नजर आए। तृतीय दिवस की कथा के समापन पर आरती एवं प्रसादी वितरण हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने सहभागिता की।