रामायण एवं पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन पर वक्ताओं ने रखे विचार जबलपुर (ईएमएस)। जबलपुर चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के तृतीय दिवस पर आज प्रात: 11 बजे बिहार के राज्यपाल एवं भारतीय संस्कृति ज्ञान परंपरा के प्रवाहक आरिफ मोहम्मद पहुंचे। आपके साथ शिक्षा मंत्री मप्र शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह उपस्थित रहे। कॉन्फ्रेंस के द्वितीय दिवस में आयोजित विभिन्न सत्रों में रामायण के सामाजिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय एवं वैश्विक पक्षों पर गहन विमर्श हुआ। द्वितीय दिवस के आठवें सत्र में रामायण एवं पर्यावरण: संरक्षण और संवर्धनÓ विषय पर वक्ताओं ने विचार रखे। बांग्लादेश से आए डॉ. सरीन ने कहा कि यदि रामचरितमानस के मूल्यों को व्यवस्थित रूप से समाज में लागू किया जाए तो आधुनिक युग में भी रामराज्य की संकल्पना साकार हो सकती है। थाईलैंड की डॉ. करुणा शर्मा ने रामायण के अंतिम क्षणों में रावण (थोसाकन) की मन:स्थिति पर प्रकाश डालते हुए रामचरितमानस और थाई रामायण रामाकियन के अंतर बिंदुओं की विवेचना की। जीवन मूल्यों की सार्वकालिक प्रासंगिकता प्रो. निशा पांडे ने रामायण में निहित जीवन मूल्यों की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि मानस का प्रत्येक पात्र हमें धर्म, कर्तव्य और राजनीति के संतुलित जीवन का मार्ग दिखाता है। उन्होंने धर्म के पाँच स्तंभोंÓ के माध्यम से विकास और धर्म की पुन: स्थापना पर बल दिया। रोम में रामÓ और वैश्विक रामकथा रोम में रामÓ विषय पर नम: शिवाय अरजरिया, जिला पंचायत सीईओ (छतरपुर) ने बताया कि ईसा पूर्व 950- 70 ई.पू. के कालखंड की एट्रस्केन सभ्यता की पेंटिंग्स इटली के संग्रहालयों में उपलब्ध हैं, जिनमें रामकथा के संकेत मिलते हैं। उन्होंने विभिन्न देशों की रामायण परंपराओं में पात्रों के दार्शनिक पक्ष पर विस्तार से चर्चा की। मॉरीशस और थाईलैंड में जीवंत रामायण परंपरा डॉ. वीनू अरुण (मॉरीशस) ने रामायण शोध संस्थान के0 माध्यम से युवाओं के बीच किए जा रहे कार्योंकी जानकारी दी। वहीं घनश्याम शर्मा ने मॉरीशस को एलिविंग रामायणाÓ बताते हुए कहा कि वहां विवाह और उत्सवों में भी राम से जुड़े गीत गाए जाते हैं। थाईलैंड से आए मिस्टर किट्टी पोंग ने हिंदी में वक्तव्य देते हुए बताया कि थाई रामायण रामाकियन को बच्चों और युवाओं को नृत्य के माध्यम से सिखाया जाता है तथा रामानंद सागर की रामायण का थाई अनुवाद भी किया गया है। काव्य, नाट्य और सांस्कृतिक प्रस्तुति कवि कोविद कहि, सके कहां तेÓ पर सुदीप भोला ने अभय सिंह निर्भीक एवं आलोक पाठक के साथ सामाजिक चेतना और समसामयिक विषयों पर आधारित काव्य प्रस्तुति दी। आलोक पाठक की कविता कैकई को कोष संघ कोसों डगर चलत कविता ने सभी को मंत्र मुक्त कर दिया। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति पंकज गौर ने अपने शोध पत्र में जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार न्यायालयों ने अपने फैसलों में रामायण के संदर्भों का उपयोग किया है। उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था में रामचरितमानस की उपादेयता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के हॉल-2 में प्रसिद्ध लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक डॉ. शांतनु गुप्ता द्वारा संचालित रामायण स्कूल विशेष आकर्षण रहा। विभिन्न विद्यालयों से आए बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। डॉ. गुप्ता ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सरल एवं रोचक शैली में संपूर्ण रामायण की प्रासंगिकता समझाई। .../ 4 जनवरी /2026