क्षेत्रीय
05-Jan-2026
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रायपुर(ईएमएस)। छत्तीसगढ़ में बिजली बिल की बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे पावर कंपनी प्रबंधन की परेशानी बढ़ गई है। एक तरफ घरेलू और छोटे उपभोक्ताओं के खिलाफ सख्त वसूली अभियान चलाया जा रहा है, तो दूसरी ओर बड़े और प्रभावशाली बकायादारों से वसूली करना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। जानकारी के मुताबिक, केवल सरकारी विभागों पर ही करीब 3 हजार करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में विधानसभा और आईएएस एसोसिएशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम भी शामिल हैं। रिकॉर्ड के अनुसार विधानसभा पर 22 लाख 75 हजार रुपये, जबकि आईएएस एसोसिएशन पर 64 लाख 35 हजार रुपये का बिजली बिल बकाया है। पावर कंपनी के सूत्रों का कहना है कि सरकारी और घरेलू उपभोक्ताओं को मिलाकर प्रदेश में कुल बकाया राशि लगभग 7 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। बकाया वसूली के लिए कंपनी द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पहले बिजली अमला मौके पर पहुंचकर कनेक्शन काटता था, लेकिन अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद कंट्रोल रूम से ही तीन बार मैसेज भेजकर बिजली आपूर्ति बंद की जा रही है। इसी बीच यह सवाल भी उठने लगे हैं कि करोड़ों रुपये बकाया रखने वाले बड़े उपभोक्ताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, जबकि छोटे और घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति तुरंत काट दी जाती है। इसे लेकर पावर कंपनी की वसूली नीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कंपनी के रिकॉर्ड बताते हैं कि विधानसभा ने अंतिम बार 20 नवंबर 2015 को 29 हजार 380 रुपये का भुगतान किया था। इसके बाद से करीब 10 वर्षों से बिजली बिल जमा नहीं किया गया है। वहीं आईएएस एसोसिएशन ने आखिरी बार 31 जनवरी 2011 को मात्र 2 हजार 585 रुपये का भुगतान किया था। सत्यप्रकाश(ईएमएस)05 जनवरी 2026