क्षेत्रीय
05-Jan-2026
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- प्रयागराज की त्रिवेणी में गंगा- यमुना-सरस्वती का मिलन भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का पंडाझीर गांव सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है। भोपाल के डॉक्टर सिंह की रिपोर्ट इंटरनेशनल एसोसिएशन आफ हाइड्रो जियौलास्टिक के जनरल में प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट के अनुसार पंडाझीर गांव सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के रिटायर्ड रीजनल डायरेक्टर डॉक्टर सुभाष चंद्र सिंह ने अपने शोध में स्पष्ट किया है। सरस्वती का उद्गम स्थल छतरपुर जिले में है। यहां पर वर्षों से भूमिगत जल निकल रहा है। कुछ दूर तक बहने के बाद यह जमीन में विलुप्त हो जाता है। यही पानी भीमकुंड, अर्जुन कुंड, सदवा गुफा और पातालगंगा में बह रहा है। बाद में यही जल चित्रकूट की गुप्त गोदावरी में प्रवाहित हो रहा है। यही जल आगे चलकर त्रिवेणी में सरस्वती के रूप में मिल रहा है। भीमकुंड में जो जल मिलता है। उसकी विशेषता है, आधे घंटे में ही इसका पानी पूरी तरह से साफ हो जाता है। यहां पर इस पानी की गहराई का पता नहीं चलता है। भीम कुंड में मिला पानी समुद्र तल से ऊंचाई 430 मीत्टर,पांडव गुफा पन्ना में 269 चित्रकूट की गुप्त गोदावरी में 196 और प्रयागराज में 100 मी. पाई गई है। इससे स्पष्ट होता है, छतरपुर जिला सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है। अध्ययन के दौरान यह भी पाया गया है। बड़ा मलहरा और प्रयाग में एक जेसी चूना पत्थर की चट्टानें हैं। जो बिजावर और विंध्यन युग की हैं। रिसर्च के अनुसार केन नदी भीमकुंड से प्रयाग की ओर जाने वाली लाइनामेन्ट को पन्ना जिले मैं क्रॉस करती है। वहां इसका पानी कम हो जाता है। प्रयागराज के बाद गंगा नदी में पानी बढ़ जाता है। इस लाइनामेंट के करीब बांदा जिले में किए गए बोर के माध्यम से इस तथ्य की पुष्टि हुई है। इंटरनेशनल एसोसिएशन का हाइड्रो जियोलॉजिस्टिक में और भी कई वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। एसजे/ 5 जनवरी /2026