क्षेत्रीय
05-Jan-2026
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- खांसी रुक नहीं रही, तय समय पर बदन दर्द के साथ चढ़ रहा बुखार भोपाल (ईएमएस)। राजधानी में कोहरा और तेज ठंड का मौसम बना हुआ। इस कारण सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इस समस्या को वायु प्रदूषण और गंभीर बना देता है। खासकर सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर ज्यादा होता है, तब बाहर निकलने पर सांस से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। अस्पतालों में सबसे ज्यादा 50 से 60 साल से ऊपर के मरीज पहुंच रहे हैं। खासकर वे लोग, जिन्हें पहले से अस्थमा, सीओपीडी या दिल से जुड़ी बीमारी है। बुजुर्गों में ठंड और प्रदूषण दोनों मिलकर परेशानी बढ़ा रहे हैं। बच्चों में भी सर्दी-खांसी और सांस की हल्की दिक्कत के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन गंभीर मरीजों में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। भोपाल में चारो ओर धूल की समस्या बनी हुई है। इसके अलावा एक्यूआई भी 230 तक पहुंच रहा है। यह सभी फैक्टर मिलकर इस बार के वायरल को मजबूत बना रहे हैं। जिसकी वजह से कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग बार बार सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार के साथ सांस फूलने और सीने में जकडऩ की समस्या से ग्रसित हो रहे हैं। जेपी अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, बीते सालों की तुलना में इस साल ठंड में एलर्जिक राइनाइटिस के केस दो गुना ज्यादा सामने आ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह पॉल्यूशन और धूल है। वायरस पहले के मुकाबले ज्यादा ताकतवर चिकित्सकों का कहना है कि मौजूदा वायरस पहले के मुकाबले ज्यादा ताकतवर है, इसलिए बच्चों को ठंड से बचाकर रखना बेहद जरूरी है। अगर इसके बावजूद ठंड या वायरल से जुड़ी कोई परेशानी नजर आए, तो बिना देर किए नजदीकी डॉक्टर को दिखाना चाहिए और उनकी सलाह के अनुसार इलाज शुरू करना चाहिए। सर्दी बढ़ते ही अस्पतालों की ओपीडी में दिल और सांस से जुड़ी शिकायतों के मरीज 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। पहले हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में 150 के करीब ह्रदय रोगी पहुंच रहे थे। अब यह संख्या बढक़र 200 के करीब पहुंच गई है। डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादातर मरीजों में सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार के साथ सांस फूलने और सीने में जकडऩ की समस्या शुरुआती लक्षण के रूप में नजर आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड का असर सीधे फेफड़ों और दिल पर पड़ता है। जेपी अस्पताल के श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन शर्मा ने बताया कि ठंडी हवा जब नाक के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचती है, तो वह सांस की नलियां सिकुड़ कर सकरी हो जाती हैं। इसे मेडिकल भाषा में ब्रोन्कोकन्सट्रिक्शन कहा जाता है। इससे सबसे अधिक प्रभावित अस्थमा और सीओपीडी के पुराने मरीज होते हैं। इनके अलावा वे मरीज भी इसकी चपेट में आते हैं जिनमें इन दोनों बीमारी की शुरुआत हो चुकी होती है। इन मरीजों में सबसे आम लक्षणों में सांस फूलना, खांसी बढऩा और सीने में भारीपन होना है। विनोद / 05 जनवरी 26