सिंगरौली (ईएमएस) चितरंगी के गढ़वा थाना क्षेत्र अंतर्गत चितावल खुर्द में हुआ हादसा कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक पूर्व घोषित हत्या है अवैध रेत उत्खनन की इस अंधी दौड़ में खदान धंसी और सुनील कुमार केवट की जान चली गई, कैलाश केवट गंभीर रूप से घायल हो गया सवाल यह नहीं कि खदान क्यों धंसी—सवाल यह है कि खदान धंसने दी क्यों गई? मुन्नालाल केवट के घर के पास लंबे समय से खुलेआम अवैध रेत लोडिंग चल रही थी यह सब “अंधेरे में” नहीं हो रहा था, बल्कि दिन-दहाड़े, सबकी नजरों के सामने फिर भी जिम्मेदार महकमे खामोश रहे अब जब एक गरीब मजदूर की लाश निकली, तो सिस्टम जागने का नाटक करेगा जांच के नाम पर खानापूर्ति, और कुछ दिन बाद वही सन्नाटा स्थानीय लोगों का आक्रोश जायज़ है गढ़वा थाना प्रभारी पर “चादर ओढ़कर घी पीने” के आरोप यूं ही नहीं लग रहे अगर पुलिस और प्रशासन समय रहते कार्रवाई करते, तो शायद आज एक घर उजड़ने से बच जाता अवैध खनन माफिया की बेखौफी इस बात का प्रमाण है कि उन्हें संरक्षण हासिल है वरना कानून का डर कब का लग चुका होता यह हादसा प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा है सवाल सीधे हैं अवैध खनन की सूचना किसे नहीं थी? कार्रवाई क्यों नहीं हुई?जिम्मेदारी तय होगी या फाइलों में दफन कर दी जाएगी? अब केवल संवेदना नहीं, जवाब और कार्रवाई चाहिए दोषियों की पहचान हो, संरक्षण देने वालों पर भी शिकंजा कसा जाए, और अवैध रेत उत्खनन पर तत्काल, प्रभावी और स्थायी रोक लगे। वरना यह मान लेना चाहिए कि सिस्टम ने तय कर लिया है—मुनाफा बहेगा, और बीच-बीच में गरीबों का खून भी। सिंगरौली (ईएमएस) सूरज सिंह 11 जनवरी 2026