:: दो वर्षों में 44 हजार से अधिक उद्यमों का पंजीयन, 1.70 लाख युवाओं को मिला रोजगार; शत-प्रतिशत उद्योग युक्त हुईं ग्राम पंचायतें :: इन्दौर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर अब वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उद्योग एवं रोजगार वर्ष 2025 के अंतर्गत चलाई गई मुहिम के चलते इंदौर जिले में निवेश और नौकरियों का परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में निजी क्षेत्र की भागीदारी से 15 नए इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित किए गए हैं। इन पार्कों में लगने वाले 700 नए उद्योग न केवल अर्थव्यवस्था को गति देंगे, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से 20 हजार से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेंगे। :: लॉजिस्टिक का ग्लोबल गेटवे बनेगा इंदौर :: निवेशकों की पहली पसंद बनने के पीछे इंदौर की सुदृढ़ होती कनेक्टिविटी और भविष्यगामी योजनाएं हैं। आने वाले 3-4 वर्षों में इंदौर रेलवे का एक विशाल हब बनने जा रहा है। वर्तमान में यहाँ से संचालित होने वाली ट्रेनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 300 करने का लक्ष्य है। इंदौर अब उज्जैन-नागदा-रतलाम, खंडवा और मनमाड़ सहित छह अलग-अलग दिशाओं में रेल नेटवर्क से सशक्त होगा। सड़क नेटवर्क के विस्तार का आलम यह है कि देश की 60 प्रतिशत आबादी अब इंदौर की 700 किमी की परिधि में समाहित है। राज्य सरकार का विजन अत्यंत स्पष्ट है - लॉजिस्टिक लागत को वर्तमान 14 प्रतिशत से घटाकर 7 से 8 प्रतिशत पर लाना। इसके लिए गति शक्ति लॉजिस्टिक मास्टर प्लान के तहत एडीबी बैंक के सहयोग से एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है। इससे उत्पादन लागत कम होगी और इंदौर में बने उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। :: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव :: इंदौर जिले ने एक और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। जिला प्रशासन और उद्योग विभाग के संयुक्त प्रयासों से इंदौर अब शत-प्रतिशत उद्योग ग्राम पंचायत वाला जिला बन गया है। वर्ष 2024 के प्रारंभ तक जिले की 334 ग्राम पंचायतों में से 189 पंचायतें उद्योग विहीन थीं। एक विशेष अभियान चलाकर शेष सभी 160 पंचायतों में लघु एवं कुटीर उद्योग स्थापित किए गए। इस पहल से 2,000 से अधिक ग्रामीणों को उनके घर के पास ही रोजगार मिला है, जिससे शहरों की ओर पलायन रुकेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बनेगी। :: आंकड़ों में सफलता : अनुदान से लेकर महिला उद्यमिता तक :: उद्यम पंजीयन और वित्तीय सहायता के मामले में इंदौर ने लंबी छलांग लगाई है: रिकॉर्ड पंजीयन : वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान कुल 44,501 नए उद्यमों का पंजीयन हुआ, जिससे निर्माण और सेवा क्षेत्र में 1,70,678 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ। सीधी सब्सिडी : ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देते हुए पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से 341 औद्योगिक इकाइयों को 328.50 करोड़ रुपये का अनुदान सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। महिला सशक्तिकरण : एमएसएमई विभाग की योजनाओं के माध्यम से दो वर्षों में 301 महिला उद्यमियों को अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए विशेष सहयोग प्रदान किया गया। उद्यम क्रांति : मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत कुल 964 युवाओं को ऋण और वित्तीय लाभ देकर उद्यमी बनाया गया। :: उद्योग मित्र नीतियों से बढ़ा निवेशकों का भरोसा :: महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, स्वप्निल गर्ग के अनुसार, सरकार की ऑनलाइन सुविधाएं, पारदर्शी कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार मुक्त सब्सिडी वितरण ने निवेशकों के बीच सकारात्मक संदेश भेजा है। पूरे प्रदेश में अब तक 5 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी लाभार्थियों को दी जा चुकी है। शासन का प्रयास है कि प्रदेश का युवा केवल जॉब सीकर (नौकरी मांगने वाला) न रहे, बल्कि जॉब गिवर (नौकरी देने वाला) बने। आने वाले वर्षों में इंदौर का यह औद्योगिक मॉडल पूरे देश के लिए एक नज़ीर साबित होगा। प्रकाश/11 जनवरी 2026