राज्य
13-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली में भीषण ठंड से बेघर लोगों की दुर्दशा पर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने सरकार से रैन बसेरों की बदहाली पर जवाब मांगा है। दिल्ली इन दिनों कड़ाके की ठंड की चपेट में है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी उन गरीब और मजबूर लोगों को झेलनी पड़ रही है, जिनके पास सिर छुपाने की कोई पक्की जगह नहीं है। इसी गंभीर हालात को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए शहर के नाइट शेल्टर यानी रैन बसेरों की बदहाल स्थिति पर सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड को इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि लोगों को ठंड से बचाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को तुरंत और ठोस कदम उठाने होंगे। कोर्ट की टिप्पणी बेहद संवेदनशील थी। जजों ने कहा अगर भगवान न करे, हम में से किसी को भी एक रात वहां गुजारनी पड़े तो पता नहीं क्या हाल होगा। इसलिए इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह टिप्पणी बताती है कि हालात कितने चिंताजनक हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में यह मामला उस समय सामने आया जब जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने न्यूज रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा जब दिल्ली का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया था तब भी कई लोग खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर थे। खासोकर एम्स मेट्रो स्टेशन के बाहर मरीजों और उनके परिजनों की हालत बेहद खराब थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड और बिहार से इलाज के लिए दिल्ली आए कई लोग इतने गरीब हैं कि वे किसी होटल या गेस्ट हाउस में ठहरने का खर्च नहीं उठा सकते। मजबूरी में वे फुटपाथों और मेट्रो स्टेशनों के बाहर रात काट रहे हैं, जहां न तो सही ढंग की छत है और न ही ठंड से बचाव की कोई व्यवस्था। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/13/ जनवरी /2026