15-Jan-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। अंतरिक्ष में एक विशालकाय ब्लैक होल ने अत्यंत बड़े तारे को इस तरह निगल लिया, जैसे कोई मामूली नाश्ता हो। यह खुलासा अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की बैठक में किया गया, जहां विशेषज्ञों ने बताया कि ब्लैक होल की असाधारण गुरुत्वाकर्षण शक्ति ने तारे को टुकड़े-टुकड़े कर दिया। इस घटना को वैज्ञानिकों ने ‘व्हिपेट’ नाम दिया है, जो अब ब्रह्मांड के इतिहास के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों में गिनी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब वह विशाल तारा ब्लैक होल के बेहद करीब पहुंचा, तो उसकी जबरदस्त ग्रेविटी ने तारे को अपनी ओर खींच लिया। कुछ ही पलों में तारा पूरी तरह बिखर गया और उसकी गैसें एक घूमती हुई डिस्क में बदल गईं, जिसे ब्लैक होल ने धीरे-धीरे निगलना शुरू कर दिया। इस प्रक्रिया के दौरान जो विस्फोट हुआ, उससे निकली ऊर्जा हमारे सूर्य से करीब 400 अरब गुना अधिक थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह विस्फोट किसी भी सामान्य सुपरनोवा से कहीं ज्यादा घातक और शक्तिशाली था। इस घटना से निकली रोशनी पृथ्वी तक पहुंची, जिसने वैज्ञानिकों को तुरंत सतर्क कर दिया। लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेनियल पर्ली ने इसे ब्लैक होल और उसके साथी तारे के बीच एक “खूनी मुकाबला” बताया। उनके अनुसार, ब्लैक होल ने तारे को पूरी तरह उधेड़ दिया, जिससे अत्यंत तीव्र चमक पैदा हुई। इस दौरान इतनी अधिक ऊर्जा और बिजली उत्पन्न हुई कि वैज्ञानिक भी उसकी कल्पना नहीं कर पाए थे। इस विस्फोट को सबसे पहले कैलिफोर्निया की एक ऑब्जर्वेटरी ने रिकॉर्ड किया, जिसके बाद नासा के स्विफ्ट सैटेलाइट और कैनरी आइलैंड्स के शक्तिशाली टेलीस्कोप से इसकी गहन जांच की गई। जांच में सामने आया कि यह घटना ‘ल्यूमिनस फास्ट ब्लू ऑप्टिकल ट्रांजिएंट’ यानी एलएफबीओटी श्रेणी की है, जो बेहद दुर्लभ मानी जाती है और आमतौर पर तारों के विनाश के समय ही दिखाई देती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि व्हिपेट धमाके का तापमान असाधारण रूप से ज्यादा था और इसमें से भारी मात्रा में एक्स-रे तथा नीली रोशनी निकल रही थी। कैल्टेक और यूसीएल के वैज्ञानिकों ने इसकी दूरी और ऊर्जा का आकलन कर पुष्टि की कि यह विस्फोट अब तक देखे गए सबसे बड़े सुपरनोवा से भी कई गुना अधिक शक्तिशाली था। इस धमाके से निकली शॉक-वेव प्रकाश की गति के लगभग पांचवें हिस्से के बराबर रफ्तार से अंतरिक्ष में फैली। हालांकि करीब छह महीने बाद इसकी तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगी, लेकिन ब्लैक होल के चारों ओर मलबे की एक गर्म और घूमती हुई डिस्क बनी रही। जैसे-जैसे यह मलबा ब्लैक होल की ओर गिरता गया, उसका तापमान और बढ़ता चला गया। इस महाविनाश के बाद भी वैज्ञानिक कई सवालों को लेकर उलझे हुए हैं। शुरुआती एक महीने तक इस घटना में कोई स्पष्ट केमिकल संकेत नहीं मिले, लेकिन बाद में हाइड्रोजन और हीलियम के निशान दिखाई दिए। हैरानी की बात यह रही कि हीलियम गैस करीब 6000 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की दिशा में बढ़ रही थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि तारे का कोई हिस्सा शायद इस तबाही से बच गया हो और अब वह बेहद तेज गति से अंतरिक्ष में घूम रहा हो। सुदामा/ईएमएस 15 जनवरी 2026