15-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आमतौर पर डायबिटीज के मरीज केवल दवाओं पर निर्भर रहते हैं, लेकिन न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स और टाइप-2 डायबिटीज विशेषज्ञ मानते हैं कि सही डाइट अपनाकर इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ खास फूड्स को नियमित रूप से शामिल करने पर महज एक हफ्ते में ही शुगर लेवल में सकारात्मक बदलाव देखा जा सकता है। भिंडी को डायबिटीज के लिए प्राकृतिक वरदान माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो खाने के बाद ग्लूकोज को धीरे-धीरे खून में रिलीज करता है। इससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता और इंसुलिन बेहतर तरीके से काम करता है। वहीं एवोकाडो हेल्दी फैट और फाइबर से भरपूर होता है। यह पाचन की गति को धीमा करता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और शुगर लेवल स्थिर बना रहता है। मशरूम लो-कार्ब फूड का बेहतरीन विकल्प है। इसमें कार्बोहाइड्रेट बेहद कम होते हैं और यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में मदद करता है। साथ ही शरीर में सूजन घटाकर मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है। टोफू प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। मजबूत मसल्स ग्लूकोज का बेहतर इस्तेमाल करती हैं, जिससे ब्लड शुगर संतुलन में रहता है। ग्रीन टी को मेटाबॉलिज्म बूस्टर माना जाता है। इसमें मौजूद कैटेचिन नामक एंटीऑक्सीडेंट ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को सुधारते हैं और वजन घटाने में मदद करते हैं। वजन कंट्रोल में रहने से डायबिटीज को मैनेज करना आसान हो जाता है। फूलगोभी में सल्फोराफेन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर की आंतरिक सूजन को कम करता है। कम सूजन का सीधा मतलब है इंसुलिन की बेहतर कार्यक्षमता और संतुलित शुगर लेवल। जौ यानी बार्ली फाइबर का पावरहाउस माना जाता है। यह ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकता है और पाचन तंत्र को मजबूत करता है। जौ की रोटी या जौ का पानी लंबे समय तक ऊर्जा देता है और शुगर को नियंत्रण में रखने में सहायक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन फूड्स को दवाओं के साथ संतुलित मात्रा में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। सुदामा/ईएमएस 15 जनवरी 2026