राष्ट्रीय
15-Jan-2026
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-1842 में बंगाल नेटिव आर्मी अफगानिस्तान से गजनवी के मकबरे से इसे उखाड़ लाई थी आगरा (ईएमएस)। सोमनाथ मंदिर के विध्वंस के एक हजार साल पूरा होने पर 8 से 11 जनवरी तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया। सोमनाथ मंदिर पर 1025 ईस्वी में हमला करने वाले महमूद गजनवी से आगरा के किले का इतिहास भी जुड़ा हुआ है। आगरा किला में महमूद गजनवी के मकबरे का दरवाजा रखा हुआ है। प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध 1842 में विजयी रही बंगाल नेटिव आर्मी अफगानिस्तान के गजनी स्थित गजनवी के मकबरे से इस दरवाजे को उखाड़ लाई थी। भारतीय लोगों की सहानुभूति पाने को अंग्रेजों ने इस दरवाजे को महमूद गजनवी द्वारा लूटा गया सोमनाथ मंदिर का दरवाजा बताकर झूठ बोला था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक सर जान मार्शल ने दरवाजे का सच उजागर किया था। आगरा किला में दीवान-ए-खास के पास एक कक्ष में विशाल दरवाजा रखा है। इसके बाहर लगाए गए शिला पट्ट के मुताबिक यह दरवाजा गजनी स्थित महमूद गजनवी के मकबरे पर लगा था। प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध, 1842 में जीत के बाद बंगाल नेटिव आर्मी ने यह दरवाजा उखाड़कर ले आई थी। गर्वनर जनरल लार्ड एलनबरो ने झूठी घोषणा की थी कि यह चंदन का वही दरवाजा है, जिसे 1025 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर से महमूद गजनवी लूटकर ले गया था। एलनबरो ने इसे 800 वर्ष पुराने अपमान का बदला कहकर प्रचारित किया। सोमनाथ मंदिर का दरवाजा बताए जाने की वजह से रास्ते में पड़े गांवों में इसका स्वागत किया गया। आगरा में यह दरवाजा आगरा किला में रखा गया था। अन्य सामान तो यहां से चला गया, लेकिन यह दरवाजा यहीं रहा। करीब छह दशक तक यह झूठ प्रचारित किया गया। इस दरवाजे का निर्माण गजनी में मिलने वाली स्थानीय देवदार की लकड़ी से किया गया है। दरवाजे के ऊपरी भाग में अरबी भाषा में महमूद गजनवी की पदवियों का उल्लेख है। आजाद भारत में सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार होने पर इसे वहां लगवाने पर विचार किया गया था, लेकिन इसका सच सामने आने पर यह विचार त्याग दिया गया। गजनी दरवाजा 16.5 फीट ऊंचा और 13.5 फीट चौड़ा है। करीब आधा टन वजनी दरवाजे में कीलों का प्रयोग नहीं किया गया है। यह ज्यामितीय तारारूपक, षटकोणीय और अष्टकोणीय फलकों को फ्रेम में एक-दूसरे से जोड़कर बनाया गया है। जिस कक्ष में यह दरवाजा रखा है, उसके बाहर हिंदी व अंग्रेजी में लगे शिला पट्ट में इसे गजनी दरवाजा बताया गया है। हालांकि, इसके पास छोटा सा शिला पट्ट भी है, जिस पर सोमनाथ दरवाजा लिखा है। सिराज/ईएमएस 15 जनवरी 2026