राष्ट्रीय
15-Jan-2026


नई दिल्ली(ईएमएस)। भारतीय सेना दिवस का संबंध फील्ड मार्शल केएम करियप्पा से है। 15 जनवरी 1949 को उन्होंने ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली। करियप्पा ने द्वितीय विश्व युद्ध और 1947 के भारत-पाक युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। उनका नेतृत्व सेना को अनुशासित और पेशेवर बनाने में निर्णायक रहा। उनका नारा था कि “सेना न हिंदू है, न मुस्लिम और न ईसाई, सेना सिर्फ भारतीय है। हर साल 15 जनवरी को भारत ‘भारतीय सेना दिवस’ के रूप में मनाता है। यह दिन उन वीर सैनिकों को समर्पित है, जो सीमाओं पर दिन-रात पहरा देकर देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। साल 2026 में भारत 78वां सेना दिवस मना रहा है। यह दिन केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है, जब भारतीय सेना की कमान पहली बार एक भारतीय अधिकारी, फील्ड मार्शल केएम करियप्पा के हाथों में आई। इस साल की थीम ‘नेटवर्किंग और डेटा-सेंट्रिसिटी का वर्ष’ है, जो आधुनिक युद्ध कौशल में तकनीक के महत्व को दर्शाती है। सेना दिवस का मुख्य उद्देश्य उन शहीदों को श्रद्धांजलि देना है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया। साथ ही यह दिन युवाओं को सेना में भर्ती होने और राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करने का भी माध्यम है। 2026 में मुख्य परेड पहली बार पारंपरिक छावनियों से बाहर निकालकर जनता के बीच आयोजित की जा रही है। इस साल मुख्य परेड जयपुर के जगतपुरा महल रोड पर आयोजित की जा रही है। आम नागरिकों के लिए पहली बार इसे सार्वजनिक मार्ग पर लाया गया है। परेड में ‘भैरव बटालियन’ का डेब्यू, ‘अपाचे’ हेलीकॉप्टरों का फ्लाईपास्ट, स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल और पिनाका रॉकेट सिस्टम का प्रदर्शन मुख्य आकर्षण हैं। भारतीय सेना अब केवल संख्या बल में नहीं, बल्कि तकनीक में भी अग्रणी बन रही है। नेटवर्किंग और डेटा-सेंट्रिसिटी के माध्यम से युद्ध में रियल-टाइम डेटा, ड्रोन तकनीक और साइबर सुरक्षा के जरिए दुश्मनों का मुकाबला किया जाएगा। ‘नो योर आर्मी’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए जनता को इन आधुनिक हथियारों और क्षमताओं से परिचित कराया जा रहा है। 78वें सेना दिवस ने वीरता, परंपरा और आधुनिक तकनीक का बेहतरीन संगम प्रस्तुत किया है, और राजस्थान की राजधानी जयपुर ने इसे भव्यता और गर्व के साथ मनाने का गौरव हासिल किया। वीरेंद्र/ईएमएस/15जनवरी2026