राज्य
15-Jan-2026
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लखनऊ,(ईएमएस)। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश शिक्षकों द्वारा दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई के बाद पारित किया गया, जिसमें समायोजन प्रक्रिया में अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए गए थे। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने 12 अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया कि 19 जनवरी तक याची शिक्षकों के समायोजन से संबंधित कोई भी अग्रिम कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शिक्षा विभाग तीसरे चरण के समायोजन में स्थापित नियमों की अनदेखी कर रहा है। याचिकाओं में कहा गया है पहले चरण के समायोजन के कारण कई जिलों के स्कूलों में ‘एकल शिक्षक’ की स्थिति बन गई, जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई, अगस्त में हुए दूसरे चरण के समायोजन के बावजूद तकनीकी और प्रशासनिक खामियां दूर नहीं की गईं, और कुछ जिलों में वरिष्ठ शिक्षकों को मनमाने तरीके से स्थानांतरित किया गया जबकि कनिष्ठ शिक्षकों को निशाना बनाया गया। शिक्षकों का कहना है कि स्थानांतरण और समायोजन की यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। बिना स्पष्ट नीति के किए जा रहे बदलावों से शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। अब सभी की निगाहें 19 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को कोर्ट के सामने इन विसंगतियों का जवाब देना होगा। इस आदेश से साफ संदेश गया है कि शिक्षकों के हितों और नियमों का पालन सुनिश्चित किए बिना कोई भी समायोजन कार्यवाही नहीं हो सकती। शिक्षकों का यह आंदोलन और याचिकाएं प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं, जो शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/15जनवरी2026

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