नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित 17वीं सदी का बारापुला ब्रिज, जो अतिक्रमण और उपेक्षा का शिकार था, अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षण के बाद पैदल यात्रियों के लिए फरवरी में खुलेगा। दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित 17वीं सदी का ऐतिहासिक बारापुला ब्रिज अब लंबे इंतजार के बाद फिर से लोगों की आवाजाही के लिए तैयार है। दशकों तक अतिक्रमण और उपेक्षा झेलने वाले इस विरासत पुल का संरक्षण कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने लगभग पूरा कर लिया है। फरवरी महीने में यह पुल दोबारा खुलेगा, लेकिन इस पर केवल पैदल चलने की अनुमति होगी। पुल को खोलने के साथ ही इसके दोनों सिरों पर लोहे के गेट लगे रहेंगे। अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला पुल की ऐतिहासिक संरचना को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है। अब इस पुल से किसी भी तरह के वाहन नहीं गुजर सकेंगे। केवल पैदल यात्री ही यहां से आ-जा पाएंगे, ताकि सदियों पुरानी बनावट पर दोबारा दबाव न पड़े। एएसआई के दिल्ली सर्कल के सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट आरके पटेल के अनुसार संरक्षण का मुख्य कार्य पूरा हो चुका है। कुछ स्थानों पर मामूली चिनाई और मरम्मत बाकी है, जिसे दो सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पुल को औपचारिक रूप से लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। बारापुला ब्रिज को संवारने में सबसे बड़ी चुनौती यहां से अतिक्रमण हटाना रहा। लगभग दो दशकों तक पुल पर अवैध दुकानों का बाजार लगा रहा। आसपास के लोग भी इसके हिस्सों को कूड़ा फेंकने की जगह के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे। वर्ष 2024 में उपराज्यपाल वीके सक्सेना के निर्देश पर 120 से अधिक अवैध विक्रेताओं को हटाया गया, जिसके बाद संरक्षण का रास्ता साफ हुआ। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ ईएमएस/16/ जनवरी/2026