- विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तिगत स्तर पर नियामक आयोग को प्रेषित की जा रही आपत्तियां : 25 जनवरी तक का समय जबलपुर (ईएमएस)। प्रदेश की बिजली कंपनियों ने बिजली के दाम औसत 10.19 प्रतिशत बढाए जाने से संबंधित प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग को प्रेषित किया है। आयोग ने इस याचिका पर 25 जनवरी तक आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इस पर जबलपुर से भी अनेक संस्थाओं और निजी स्तर पर भी नियामक आयोग के समक्ष आपत्तियां भेजी जा रही हें। ऐसी ही एक आपत्ति सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता व बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने भी प्रेषित की है। श्री अग्रवाल ने आयोग को जो आपत्ति दी है उसमें दावा किया है कि 9204 करोड़ रुपये के आंकड़े गलत और तथ्यहीन है। विद्युत नियामक आयोग यदि इन आंकड़ों से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण करेगा तो निश्चित ही घाटे की जगह मुनाफा नजर आएगा। राजेंद्र अग्रवाल के मुताबिक मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने काल्पनिक खर्च को बताकर बिजली कंपनियों का घाटा बताया है। उनके अनुसार पावर मैनजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2022-23 तक की सत्यापन याचिका में खारिज 3450.63 करोड़ रुपये पूरक बिजली खरीदी लागत की पुन: असंवैधानिक मांग की गई है। इसके अलावा 832.96 करोड़ रुपये अन्य लागत जो कि स्टेशन आधार पर आवंटित नहीं की जा सकी थी उसकी भी असंवैधानिक मांग की है। श्री अग्रवाल ने कहा कि ताप गृह से बिजली खरीदी का व्यय अलग है लेकिन अन्य व्यय की एक मुश्त यह राशि क्यों और किस लिए मांगी गई इसका कोई ब्यौरा नहीं है। यही नहीं कंपनी ने नियामक आयोग को दी गई याचिका के माध्यम से पूरक बिल के नाम पर 2185 करोड़ रुपये मांगा है जबकि आयोग ने पहले ही साफ किया है कि पूर्ण वितरण दस्तावेज सहित प्रस्तुत नहीं करने पर यह राशि स्वीकृति नहीं होगी। अग्रवाल का कहना है कि विद्युत चोरी के कारण हुए नुकसान की आम उपभोक्ता से 696 करोड़ रुपये वसूल करने की तैयारी की गई है। इसके अलावा मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पिछले दस साल की वार्षिक राजस्व आवश्यकता में पूंजीकरण में संसोधन के तहत 623 करोड़ की अवैधानिक मांग की है। वहीं याचिका में मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी का कार्य मात्र विद्युत वितरण कंपनी के लिए बिजली खरीद कर उपलबध कराना है किंतु मैनेजमेंट कंपनी समानांतर रूप से अवैधानिक रूप से बिजली खरीदी के लिए 438 करोड़ रुपये मांगे है। इसके साथ ही पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने जो राशि नहीं मांगी वो भी उल्लेखित है 5.15 करोड़ रुपये की मांग की गई है। मैनेजमेंट कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं पर दो वर्ष के ब्याज कि रुप में 774 करोड़ रुपये की मांग की है आपत्तिकर्ता ने इसे गलत मांग बताया है। इसके साथ ही स्मार्ट मीटर के लिए 197 करोड़ रुपये की मांग की है। राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग को भेजे पत्र में दावा किया है कि अभी तक बिजली वितरण कंपनियों ने स्मार्ट मीटर के नाम पर राशि का भुगतान ही नहीं किया है ऐसे में इस राशि की वसूल करना गलत है। गौरतलब हो कि मप्र विद्युत नियामक आयोग ने बिजली टैरिफ याचिका को लेकर 25 जनवरी तक आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके बाद मप्र विद्युत नियामक आयोग आपत्ति और सुझाव के आधार पर जबलपुर के साथ ही भोपाल और इंदौर में जनसुनवाई का आयोजन करेगा। राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग से मांग की है कि इस बार आनलाइन की बजाए फिजिकल जनसुनवाई की जाए ताकि लोग अपनी बात बेहतर तरीके से रख सकें। अजय पाठक / मोनिका / 16 जनवरी 2026/ 2.39