- कुछ वायरल कंटेंट फर्जी हों, लेकिन वे गंभीर समस्या की ओर इशारा कर रहे लंदन,(ईएमएस)। सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो ने हलचल मचा दी हैं वीडियो में फिलीपींस की एक 9 साल की बच्ची अल्ट्रासाउंड करवा रही है और वह गर्भवती है। वीडियो में बच्ची के मुंह में लॉलीपॉप, उसका मासूम चेहरा और पेट में बच्चे होने की बात सुनकर लोग हैरान हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक अल्ट्रासाउंड क्लिनिक में रिकॉर्ड किया गया है और इतनी कम उम्र में मां बनी बच्ची को देखकर हर कोई हैरान है। हालांकि, इस वायरल दावे के पीछे सच और झूठ का मिला-जुला चेहरा सामने आया है। फैक्ट चेक रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसे कई वीडियो और तस्वीरें असल में एआई से बनाई गई हैं या फिर पूरी तरह फर्जी हैं। दिसंबर 2024 में फिलीपींस के जनरल सैंटोस शहर से जुड़े इसी तरह के दावे सामने आए थे, जिनमें 10 से 14 साल की लड़कियों के गर्भवती होने की बात कही गई थी। बाद में एएफपी और अन्य फैक्ट चेक संगठनों ने जांच में पाया कि वायरल तस्वीरें और कुछ वीडियो वास्तविक नहीं थे, बल्कि एआई टूल्स की मदद से तैयार किए गए थे। इनका मकसद सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाना और भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा करना था। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही कुछ वायरल कंटेंट फर्जी हों, लेकिन वे एक गंभीर और वास्तविक समस्या की ओर जरूर इशारा करते हैं। एशिया में फिलीपींस किशोर गर्भावस्था के मामलों में शीर्ष देशों में शामिल है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के मुताबिक यहां टीनएज प्रेग्नेंसी की दर काफी ऊंची है। इसके पीछे बाल विवाह, यौन शिक्षा की कमी, गरीबी और सामाजिक दबाव जैसे कई कारण हैं। कई मामलों में नाबालिग लड़कियां बिना पर्याप्त जानकारी और सुरक्षा के मां बनने को मजबूर हो जाती हैं, जिसका असर उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर पड़ता है। जानकारी के मुताबिक यह समस्या केवल फिलीपींस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें भारत में भी फैली हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 15 से 19 साल की करीब 6.8 फीसदी लड़कियां पहले ही मां बन चुकी हैं या गर्भवती हैं। ग्रामीण इलाकों में यह प्रतिशत और ज्यादा है। हाल के वर्षों में कर्नाटक राज्य इस मुद्दे को लेकर खासा चर्चा में रहा है। वर्ष 2025 में अप्रैल से फरवरी के बीच राज्य में 25,436 टीनएज प्रेग्नेंसी के मामले दर्ज किए गए। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने इसे सोशल मीडिया के प्रभाव, बाल विवाह और परिवारिक संरचना में आए बदलावों से जोड़ा है। चिंता की बात यह है कि कुछ मामलों में 9 साल जैसी बेहद कम उम्र की बच्चियों के गर्भवती होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। कर्नाटक में पिछले तीन सालों में 80 हजार से ज्यादा किशोर गर्भावस्था के मामले दर्ज किए गए। तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले में महज आठ महीनों में 834 ऐसे मामले सामने आए। बिहार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों में भी स्थिति गंभीर है। आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में 16 फीसदी और बिहार में 11 फीसदी किशोर लड़कियां इस समस्या से प्रभावित हैं, जहां बाल विवाह को इसकी सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सोशल मीडिया पर फैलने वाले फर्जी और भ्रामक वीडियो भले ही सच न हों, लेकिन वे समाज को आईना जरूर दिखाते हैं। सिराज/ईएमएस 17 जनवरी 2026