-यह मूर्ति करीब 500 साल पहले तमिलनाडु के साउंडरराजा पेरुमल मंदिर से ले जाई गई थी नई दिल्ली,(ईएमएस)। ब्रिटेन ने दक्षिण भारत के वैष्णव संत थिरुमंगई अलवर की 16वीं सदी की दुर्लभ कांस्य प्रतिमा भारत लौटाने का फैसला किया है। यह मूर्ति करीब 500 साल पहले तमिलनाडु के साउंडरराजा पेरुमल मंदिर से ले जाई गई थी और 1967 में नीलामी के जरिए म्यूजियम तक पहुंची थी। रिसर्च और जांच के बाद अब इसे अपने मूल स्थान पर लौटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संत थिरुमंगई अलवर दक्षिण भारत के 12 वैष्णव अलवर संतों में अंतिम और बेहद प्रसिद्ध माने जाते हैं। वे 8वीं सदी के महान भक्त और कवि थे, जिनका असली नाम कलियान था और पहले वे सैन्य कमांडर थे। आध्यात्मिक परिवर्तन के बाद उन्होंने भक्ति मार्ग अपनाया और ‘दिव्य प्रबंधम’ नामक तमिल भक्ति साहित्य में छह अहम रचनाएं लिखीं, जिसमें भगवान विष्णु को समर्पित 4000 भक्ति स्तोत्र शामिल हैं। उन्होंने श्रीरंगम मंदिर के निर्माण और विस्तार में भी योगदान दिया। कांस्य से बनी यह प्रतिमा करीब 57-60 सेंटीमीटर ऊंची है। म्यूजियम ने यह मूर्ति 1967 में प्रसिद्ध नीलामी संस्था सूथेबी से खरीदी थी। उस समय इसे खरीदा गया, लेकिन प्रतिमा के पहले के इतिहास के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में फ्रांसीसी रिसर्चर ने पुडुचेरी के अभिलेखागार में 1957 में मंदिर में खींची गई मूर्ति की तस्वीर देखी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि मूर्ति चोरी हुई थी। इसके बाद म्यूजियम ने इसकी उत्पत्ति की जांच शुरू की और भारत के उच्चायोग से संपर्क किया। 11 फरवरी 2020 को मंदिर के अधिकारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें बताया गया कि मंदिर में रखी मूल कांस्य प्रतिमा की जगह आधुनिक प्रतिकृति रख दी गई थी। इसके बाद 3 मार्च 2020 को भारतीय उच्चायोग ने म्यूजियम में औपचारिक दावा पेश किया। ऐशमोलियन म्यूजियम ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुरोध पर मूर्ति की धातु संरचना की जांच भी करवाई। म्यूजियम के निदेशक ने कहा कि हमें खुशी है कि यह कलाकृति भारत लौट रही है। हम भारतीय अधिकारियों और विद्वानों के आभारी हैं जिन्होंने इसके इतिहास को स्थापित करने में मदद की। रिपोर्ट के मुताबिक सांस्कृतिक कार्यकर्ता और इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट ने बताया कि मूर्ति तमिलनाडु के साउंडरराजा पेरुमल मंदिर से जुड़ी है और 1957 की तस्वीरों के जरिए इसकी पहचान हुई। भारत लौटाने की पूरी प्रक्रिया में करीब आठ साल लगे। यह पहली बार नहीं है जब विदेश से भारतीय कलाकृतियां लौटाई जा रही हैं। 2022 में ग्लासगो के केल्विनग्रोव आर्ट गैलरी और म्यूजियम ने सात ऐतिहासिक कलाकृतियां भारत लौटाई थीं, जिनमें 11वीं और 14वीं सदी की पत्थर की नक्काशी और तलवार शामिल थीं। संत थिरुमंगई अलवर की यह कांस्य प्रतिमा भारत की सांस्कृतिक धरोहर की वापसी की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सिराज/ईएमएस 11 मार्च 2026