क्षेत्रीय
19-Jan-2026
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- बोले ज्संत विजय कौशल महाराज, सिद्धि का मार्ग है हनुमान, भक्ति से मिटते हैं सारे कष्ट बिलासपुर (ईएमएस)। संसार में यदि कोई दो नाम सबसे अधिक सुंदर और कल्याणकारी हैं, तो वे हैं राम और श्याम। प्रात:काल उठते ही भगवान राम और हनुमान जी का स्मरण अवश्य करना चाहिए। कुछ अज्ञानवश लोग सुबह हनुमान जी का नाम लेने या महिलाओं को उनकी पूजा से रोकते हैं, जबकि यह पूर्णत: भ्रांत धारणा है। माता स्वरूप महिलाएँ सदैव हनुमान जी की पूजा-पाठ कर सकती हैं और करनी भी चाहिए। पूजा-पाठ के दौरान बीच में उठना अनुचित है। अनुष्ठान पूर्ण एकाग्रता और श्रद्धा से होना चाहिए। यह प्रेरक संदेश लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में आयोजित संगीतमय रामकथा के दौरान संत श्री विजय कौशल महाराज ने दिया। उन्होंने कहा कि सुंदरकांड का नियमित पाठ करना चाहिए, क्योंकि यह सिद्धि का कांड है, जो सभी प्रकार के दु:ख, भय और कष्टों का नाश करता है। यदि प्रतिदिन संभव न हो, तो शनिवार और मंगलवार को इसका पाठ अवश्य करें। महाराज जी ने कहा कि घर के बुजुर्गों की बात मानने से जीवन सुगम और कार्य सरल हो जाते हैं। हनुमान जी विवेकी, बलशाली और भगवान राम के अत्यंत प्रिय हैं। माता जानकी के आशीर्वाद से उनका शरीर वज्र समान बना इसी कारण वे अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता हैं। देश में भगवान राम से भी अधिक हनुमान जी के मंदिर होना उनकी अपार भक्ति और महिमा का प्रमाण है। कथा प्रसंग में उन्होंने सुंदरकांड का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि भगवान राम के निर्देश पर हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुँचे। विभीषण के घर तुलसी वृक्ष देखकर उन्हें आनंद हुआ और अशोक वाटिका में माता सीता को विलाप करते देखा। प्रभु की मुद्रिका दिखाकर उन्होंने अपनी पहचान कराई और माता सीता ने अपनी व्यथा सुनाई। वाटिका विध्वंस, रावण सभा में प्रस्तुति, पूँछ में आग और संपूर्ण लंका दहन इन प्रसंगों से हनुमान जी की निर्भीकता, भक्ति और पराक्रम का अद्भुत चित्र उभरता है। महाराज ने कहा कि भक्तों की मृत्यु नहीं होती, वे केवल अंतर्ध्यान होते हैं। मंदोदरी और विभीषण द्वारा रावण को दिए गए सदुपदेशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने अहंकार के दुष्परिणाम भी बताए। सुंदरकांड की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके पाठ मात्र से ही भय और संकट दूर हो जाते हैं। रामकथा के आज अंतिम दिन कथा का प्रारंभ प्रात: 9.30 बजे निर्धारित है। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य संरक्षक अमर अग्रवाल, श्रीमती शशि अग्रवाल, महेश अग्रवाल, गुलशन ऋषि, गोपाल शर्मा, युगल शर्मा सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों कच्छ गुर्जर समाज, नगर साहू संघ, जैन श्वेताम्बर श्री संघ, विन्ध्याचल सांस्कृतिक मंच, सूत सारथी समाज, सनाढ्य विकास मंच, गोंड भूमिकाल समाज, विन्ध्य बिलासा सांस्कृतिक मंच, उत्कल समाज, कुर्मी क्षत्रिय सेवा समिति, भारतीय सुदर्शन समाज, गोस्वामी समाज, प्रगतिशील युवा स्वर्णकार समाज, राजपूत क्षत्रिय चौहान समाज, अयोध्यावाशी वैश्य समाज की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में अमर अग्रवाल, श्रीमती शशि अग्रवाल, विधायक धर्मजीत सिंह सहित अनेक गणमान्यजन आरती में सम्मिलित हुए। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 19 जनवरी 2026