ज़रा हटके
20-Jan-2026
...


नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को जीवंत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कराते हुए भारतीय नौसेना का पारंपरिक पाल विधि से निर्मित जहाज आईएनएसवी कौंडिन्य 18 दिनों की कठिन समुद्री यात्रा पूरी कर गुजरात से ओमान पहुंचा है। यह जहाज 29 दिसंबर को गुजरात के पोरबंदर से रवाना हुआ था और 14 जनवरी को ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचने की खबर आ गई है। इस विशेष यात्रा का उद्देश्य भारत के प्राचीन जहाज निर्माण कौशल और समुद्री परंपराओं को पुनर्जीवित करना है। आईएनएसवी कौंडिन्य को 5वीं शताब्दी के भारतीय जहाजों के मॉडल पर तैयार किया गया है। इसकी सबसे खास बात यह है, इसे बिना किसी कील या धातु के इस्तेमाल के बनाया गया है। लकड़ी के तख्तों को नारियल के रेशों से रस्सियों द्वारा सिलकर जोड़ा गया है, जिसे प्राचीन ‘टांका पद्धति’ कहा जाता है। खास बात यह है कि इस जहाज में न तो इंजन है, न बिजली, न जीपीएस और न ही कोई आधुनिक नेविगेशन सिस्टम। यह पूरी तरह हवा के रुख के सहारे कपड़े के पाल (सढ़) से चलता है। जहाज पर कोई केबिन या कमरा नहीं है। क्रू मेंबर्स खुले डेक पर स्लीपिंग बैग में सोते थे। रात के समय अन्य जहाजों को संकेत देने के लिए उनके पास केवल हेडलैंप थे। पीने का पानी मटकों में रखा गया था और 18 दिनों तक क्रू ने खिचड़ी और अचार खाकर यात्रा पूरी की। इस जहाज के मस्कट पहुंचने की जानकारी प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए साझा की। जिसके बाद से इसकी चर्चा चारों ओर हो रही है। यहां बताते चलें कि जहाज का नाम पहली सदी के प्रसिद्ध भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने हिंद महासागर पार कर मेकांग डेल्टा तक यात्रा की थी और वहां एक कंबोडियाई राजकुमारी से विवाह किया था। इस जहाज का डिजाइन अजंता गुफाओं की 5वीं सदी की एक पेंटिंग पर आधारित है। भारत सरकार ने वर्ष 2023 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इसके तहत संस्कृति मंत्रालय, भारतीय नौसेना और गोवा की निजी कंपनी होड़ी इनोवेशंस के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ। जहाज को फरवरी 2025 में गोवा में लॉन्च किया गया था। आईएनएसवी कौंडिन्य के पालों पर गंडभेरुंड और सूर्य के प्रतीक अंकित हैं, आगे की ओर सिंह याली की आकृति और डेक पर हड़प्पा शैली का प्रतीकात्मक पत्थर का लंगर लगाया गया है। यह जहाज भारत की प्राचीन समुद्री शक्ति, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बनकर उभरा है। हिदायत/ईएमएस 20 जनवरी 2026