ज़रा हटके
29-Jan-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। नई स्टडी में आयरलैंड की मेनुथ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार, शुरुआती ब्रह्मांड की अराजक और गैस से भरी परिस्थितियों ने ब्लैक होल के तेज़ी से बढ़ने की राह आसान बना दी। जेम्स वेब टेलीस्कोप ने ब्रह्मांड की सबसे बड़ी पहेली सुलझाई दी है। स्टडी के मुख्य लेखक दक्शिल मेहता के अनुसार, ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में हालात आज की तुलना में बेहद उथल-पुथल वाले थे। उस समय अंतरिक्ष घनी गैस और धूल से भरा हुआ था, जिसने नवजात ब्लैक होल को असाधारण मात्रा में पदार्थ निगलने का मौका दिया। इन परिस्थितियों में छोटे-छोटे ब्लैक होल ने अपने आसपास मौजूद हर चीज को बहुत तेजी से खींचना शुरू कर दिया। कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से वैज्ञानिकों ने पहली बार यह दिखाया कि यह प्रक्रिया कुछ ही करोड़ वर्षों में ब्लैक होल को भीमकाय आकार दे सकती है। शोध के मुताबिक ब्लैक होल के इस असामान्य विकास के पीछे ‘सुपर एडिंगटन एक्रीशन’ नाम की प्रक्रिया की अहम भूमिका रही। सामान्य हालात में जब ब्लैक होल बहुत तेजी से पदार्थ निगलता है तो उससे निकलने वाली ऊर्जा आसपास की गैस को दूर धकेल देती है, जिससे उसकी वृद्धि सीमित हो जाती है। लेकिन शुरुआती ब्रह्मांड में गैस की भरमार के कारण यह सीमा टूट गई। ब्लैक होल ने अपनी प्राकृतिक गति से कहीं अधिक तेजी से पदार्थ को निगलना जारी रखा और देखते ही देखते विशाल आकार हासिल कर लिया। अब तक वैज्ञानिक ब्लैक होल के जन्म को ‘लाइट सीड’ और ‘हैवी सीड’ जैसी श्रेणियों में बांटते थे। लाइट सीड ब्लैक होल सूरज से कुछ दर्जन गुना भारी होते हैं, जबकि हैवी सीड ब्लैक होल जन्म के समय ही सूरज से लाखों गुना बड़े माने जाते हैं। पहले यह माना जाता था कि विशाल ब्लैक होल बनने के लिए हैवी सीड का होना जरूरी है। हालांकि मेनुथ यूनिवर्सिटी के डॉ. जॉन रीगन और उनकी टीम की सिमुलेशन स्टडी ने इस सोच को चुनौती दी है। रिसर्च से साफ हुआ है कि सामान्य आकार के छोटे ब्लैक होल भी सही परिस्थितियों में दानव बन सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज केवल ब्रह्मांड के अतीत को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए भी बेहद अहम है। खास तौर पर नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के प्रस्तावित ‘लिसा’ मिशन को इससे बड़ी मदद मिलेगी, जो 2035 में लॉन्च होने वाला है। यह मिशन गुरुत्वाकर्षण तरंगों के जरिए ब्लैक होल के विलय और उनके विकास का अध्ययन करेगा। सुदामा/ईएमएस 29 जनवरी 2026