क्षेत्रीय
22-Jan-2026
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महासमुंद(ईएमएस)। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की सक्रिय पहल के चलते महासमुंद जिले में एक बच्चे के साथ क्रूरता के गंभीर मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालयीन कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यह कदम बाल अधिकारों के संरक्षण में आयोग की प्रभावी भूमिका का उदाहरण माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, जिले के एक गांव में एक रसूखदार परिवार ने एक बच्चे को निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा, जबकि उस पर 600 रुपये की चोरी का झूठा आरोप लगाया गया। जांच में यह पूरी तरह असत्य पाया गया। मारपीट के बाद बच्चे के पिता को भी गंभीर प्रताड़ना झेलनी पड़ी, जिससे उन्होंने आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने देर रात खुद गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मामले की विस्तृत जांच की। इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस महानिदेशक से समन्वय कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आयोग ने इस प्रकरण में तत्कालीन थाना प्रभारी की गंभीर लापरवाही पर भी दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की। पुलिस अधीक्षक महासमुंद ने थानेदार को निंदा की शास्ति दी, लेकिन आयोग ने इसे अपर्याप्त मानते हुए पुलिस मुख्यालय से कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करवाई। मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ चालान प्रस्तुत कर दिया गया है। प्रमुख आरोपी को जनवरी के मध्य तक जेल में रखा गया है। आरोपियों के खिलाफ बी.एन.एस. की धारा 108, 127(2), 115(2), 351(2) के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में विचाराधीन किया गया है। आयोग ने बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण दल को निर्देश दिया है कि पीड़ित बच्चे की पूरा देखभाल, शिक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए और क्षतिपूर्ति मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, न्यायालयीन प्रकरण में दोषियों के विरुद्ध किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 और बाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम से संबंधित धाराओं को अभियोग पत्र में शामिल करने के निर्देश पुलिस प्रशासन को दिए गए हैं। सत्यप्रकाश(ईएमएस)22 जनवरी 2026