क्षेत्रीय
24-Jan-2026


बिलासपुर (ईएमएस)। रिवायत का अर्थ है परंपरा और रीति-रिवाज़। शताब्दियों पूर्व लिखी गई रिवायती गज़़लें आज भी ऐसी प्रतीत होती हैं, मानो वे हमारे ही जीवन की आपबीती हों। इन गज़़लों को सुनते हुए ऐसा महसूस होता है कि हर शेर श्रोता के दिल के बेहद करीब है। साहित्यिक दृष्टि से कठिन होने के बावजूद रिवायती गज़़लें भावपूर्ण और अर्थवान होती हैं। उर्दू भाषा से सामान्य परिचय रखने वाला श्रोता भी इनमें निहित जज़्बातों को गहराई से समझ सकता है। ऐसी ही रिवायती गज़़लों की एक विशेष संध्या रिवायत 25 जनवरी 2026, रविवार को शाम 6.30 बजे लखीराम ऑडिटोरियम, बिलासपुर में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम में बिलासपुर की प्रसिद्ध शास्त्रीय, भजन एवं गज़़ल गायिका श्रुति प्रभला अपनी सुमधुर गायकी प्रस्तुत करेंगी। शुक्रवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार-वार्ता में श्रुति प्रभला ने कहा कि रिवायती गज़़लें केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति होती हैं। उन्होंने बताया कि आम तौर पर प्रचलित गज़़लें गीतनुमा होती हैं, जो सरल भाषा में लिखी जाती हैं, जबकि रिवायती गज़़लें गहरे भाव और गंभीर अनुभूति से उपजी होती हैं। इन गज़़लों के जज़्बात केवल सुनने से नहीं, बल्कि दिल से महसूस करने पर समझ में आते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने एक शेर पढ़ा अगर तू इत्तिफ़ाकऩ मिल भी जाए, तिरी फ़ुर्क़त के सदमे कम न होंगे श्रुति ने कहा कि उर्दू ज़ुबान में रची गई गज़़ल का हर शेर श्रोता की आत्मकथा बनकर उभरता है। उन्होंने आगे कहा मसर्रतों की तलाश में है मगर यह दिल जानता नहीं, अगर ग़म-ए-ज़िंदगी न हो तो ज़िंदगी में मज़ा नहीं। मूलत: शास्त्रीय गायिका श्रुति प्रभला भजन गायन में भी समान रूप से दक्ष हैं, फिर भी गज़़लों के प्रति उनका विशेष झुकाव है। इस पर उन्होंने कहा, भजन मैं गाती हूँ, लेकिन गज़़ल मेरे गले से बे-साख़्ता निकलती है। मैं स्वयं को गज़़लों के बेहद करीब पाती हूँ। श्रुति प्रभला, संगीत रिसर्च अकादमी, कोलकाता के गुरु एवं आगरा संगीत घराने के उस्ताद वसीम अहमद खान की शिष्या हैं। उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से मास्टर ऑफ़ परफ़ॉर्मिंग आर्ट्स की उपाधि प्राप्त की है। अपने संगीत-प्रशिक्षण काल में श्रुति देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी गायकी की छाप छोड़ चुकी हैं। वे अंतरराष्ट्रीय गायन प्रतियोगिता द वॉयस ऑफ़ वर्ल्ड की विजेता रह चुकी हैं। इसके अतिरिक्त इस्कॉन नेल्लोर द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय भजन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान व गोल्ड मेडल, पेंड्रा में स्व. माधवराव सप्रे स्मृति महोत्सव में कबीर गायन के लिए मुख्यमंत्री सम्मान एवं नव्या सम्मान से भी उन्हें नवाज़ा गया है। उन्होंने डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के युवा बसंत महोत्सव, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ राज्योत्सव सहित अनेक मंचों पर शास्त्रीय, गज़़ल एवं कबीर गायन की ओजस्वी प्रस्तुतियाँ दी हैं। श्रुति ने एनटीपीसी, सीपत का आधिकारिक गीत भी गाया है तथा ऑल इंडिया रेडियो के लिए विशेष गज़़ल कार्यक्रम प्रस्तुत किया है। कार्यक्रम रिवायत में अहमद फऱाज़, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, बहज़ाद लखनवी, मिर्ज़ा ग़ालिब और अल्लामा इक़बाल जैसे महान शायरों की रचनाएँ प्रस्तुत की जाएँगी। साथ ही वर्तमान दौर की प्रसिद्ध गज़़ल गायिका डॉ. राधिका चोपड़ा की गाई हुई कुछ गज़़लें भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी। श्रुति ने बताया कि डॉ. राधिका चोपड़ा गज़़ल गायन के क्षेत्र में उनकी गुरु समान हैं। गज़़लें केवल प्रेम और विरह तक सीमित नहीं होतीं। इस प्रश्न पर श्रुति ने दार्शनिक अंदाज़ में कहा कि मनुष्य का सम्पूर्ण जीवन प्रेम से ही जुड़ा है। प्रेम केवल प्रेमी-प्रेमिका तक सीमित नहीं, बल्कि माता-पिता, परिवार, समाज और ईश्वर से जुड़ा भाव भी है। रिवायती गज़़लें जीवन की पूरी यात्रा प्यार, पीड़ा, सम्मान और स्मृतियों को उजागर करती हैं। ये गज़़लें दिल की डायरी की तरह होती हैं, जहाँ हर शेर एक एहसास और एक अनकहा सच समेटे रहता है। इसी कड़ी में श्रुति प्रभला ने गज़़लों के शौकीन सभी श्रोताओं से 25 जनवरी 2026, रविवार शाम 6.30 बजे लखीराम ऑडिटोरियम में आयोजित रिवायत कार्यक्रम में उपस्थित होने की अपील की। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 24 जनवरी 2026