अंतर्राष्ट्रीय
24-Jan-2026


मुल्ला मुनीर की सेना को कूटनीतिक तमाचा तेलअवीव (ईएमएस)। मिडिल ईस्ट फिर युद्ध और चेतावनियों के मुहाने पर खड़ा हुआ है। गाजा युद्ध के बाद क्षेत्रीय राजनीति में जो नई रेखाएं खिंच रही हैं, उसमें पाकिस्तान खुद को हाशिए पर धकेला हुआ महसूस कर रहा है। इजरायल ने साफ शब्दों में कह दिया हैं कि गाजा के भविष्य से जुड़ी किसी भी शांति प्रक्रिया या ट्रांजिशन मैकेनिज़्म में पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं होगी। एक इंटरव्यू में इजरायल के वित्त मंत्री निर बरकत ने बयान दिया, वह केवल एक टिप्पणी नहीं बल्कि पाकिस्तान की सैन्य‑वैचारिक रणनीति पर सीधा हमला माना जा रहा है। दावोस में बातचीत के दौरान बरकत ने पाकिस्तान को आतंक समर्थक देश बताकर कहा कि जिन देशों ने हमास जैसे संगठनों को वैचारिक या राजनीतिक समर्थन दिया है, उन्हें गाजा की शांति प्रक्रिया से दूर रखा जाएगा। इस बयान को जनरल आसिम मुनीर की अगुवाई वाली पाकिस्तानी सेना के लिए कूटनीतिक तमाचे के तौर पर देखा जा रहा है। बीते वर्षों में पाकिस्तान ने खुद को इस्लामी देशों की एक धुरी के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की है। कुछ हलकों में इस प्रक्रिया को ‘इस्लामी नाटो’ जैसी अवधारणा से जोड़ा गया, जहां पाक सेना को नेतृत्वकर्ता की भूमिका में दिखाया गया। लेकिन इजरायल ने इस कथित “खिलाफत” को सिरे से खारिज करते हुए तंज कसा कि यह ताकत अब केवल भाषणों और बयानबाज़ी तक सीमित है। इजरायल ने साफ कर दिया है कि गाजा में किसी भी पीसकीपिंग या ट्रांजिशन फोर्स में पाकिस्तान को शामिल नहीं किया जाएगा। बरकत के अनुसार, जिन देशों पर आतंकवादी संगठनों के प्रति नरमी का आरोप है, उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान का नाम लेकर दिया गया यह संदेश केवल इस्लामाबाद के लिए नहीं, बल्कि पूरे इस्लामी ब्लॉक के लिए एक चेतावनी माना जा रहा है। इंटरव्यू में इजराइल के वित्त मंत्री बरकत ने ईरान को भी खुली धमकी दी गई। बरकत ने कहा कि अगर ईरान ने दोबारा हमला किया, तब इजरायल सात गुना ज़्यादा घातक जवाब देगा। ईरान को उन्होंने ‘ईविल एक्सिस’ का केंद्र बताया, जिस पर हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन देने का आरोप है। सबसे अहम बात यह रही कि इजरायल ने दो‑राष्ट्र समाधान को पूरी तरह खारिज कर दिया। इजरायली संसद में इस प्रस्ताव के खिलाफ लगभग सर्वसम्मति होने का दावा करते हुए बरकत ने कहा कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी शांति नहीं, बल्कि इजरायल के अस्तित्व को खत्म करने की सोच रखती है। यह रुख आने वाले समय में मिडिल ईस्ट को और अस्थिर करने वाला साबित हो सकता है। आशीष दुबे / 24 जनवरी 2026