ढाका,(ईएमएस)। बांग्लादेश इन दिनों राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। पड़ोसी देश में फरवरी में आम चुनाव होने हैं, जिसमें पूर्व पीएम शेख हसीना या उनकी पार्टी हिस्सा नहीं ले सकेगी। दूसरी ओर अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस और बीएनपी नेता तारिक रहमान भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने में जुटे हैं। खासकर मोहम्मद यूनुस ने नई दिल्ली के प्रति शत्रुता को बढ़ाने का जैसे ठेका लेकर बैठे है। इसका सबूत कुछ दिनों पहले तब मिला जब बांग्लादेश ने चीन के दूत याओ वेन को तीस्ता मास्टरप्लान में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। चीनी दूत ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के समीप वाले क्षेत्र का दौरा किया। इससे पहले मार्च 2025 में यूनुस ने बीजिंग का दौरा किया था, जहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने ‘7 सिस्टर्स’ यानी पूर्वोत्तर भारत के 7 प्रदेशों का जिक्र किया था। बांग्लादेश ने पद्मा नदी (भारत में गंगा नदी) पर नया बैराज बनाने का ऐलान किया है। भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के पानी के बंटवारे को लेकर मामला चल रहा है। भारत ने गंगा के पानी के प्रॉपर इस्तेमाल को लेकर फरक्का बैराज भी बनाया है। इतना ही नहीं साल 1996 में बांग्लादेश के साथ पानी बंटवारे को लेकर द्विपक्षीय समझौता हुआ था जो 30 साल के लिए हुआ था। इस करार की मियाद इस साल खत्म होने वाली है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव के चलते अभी तक इस समझौते को रिव्यू नहीं किया गया है। भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे से जुड़ी फरक्का संधि को रीन्यू करने पर बातचीत इस साल निर्णायक मोड़ पर है, लेकिन दोनों देशों के बीच संबंधों में बढ़े तनाव और आपसी अविश्वास के चलते वार्ताएं ठप सी दिखाई दे रही हैं। इसी बीच बांग्लादेश द्वारा गंगा नदी पर एक नया बैराज बनाने की योजना ने रीजनल वॉटर राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। यह परियोजना न केवल दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि दक्षिण एशिया में जल संसाधनों को लेकर भविष्य की कूटनीति की दिशा भी तय कर सकती है। पद्मा नदी को भारत से बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद गंगा का ही विस्तार माना जाता है। पद्मा बांग्लादेश की जीवनरेखा कही जाती है। इसपर लाखों लोग निर्भर करते हैं। आशीष दुबे / 24 जनवरी 2026