:: सृष्टि कला कुंज में आयोजित हुआ एक दिवसीय कला पर्व; वरिष्ठ कलाकारों ने कैनवास पर उकेरे वासंती रंग :: इंदौर (ईएमएस)। सांस्कृतिक प्रतिनिधि बसंत पंचमी के पावन अवसर पर बिचौली मर्दाना स्थित सृष्टि कला कुंज संस्थान के परिसर में कला, साहित्य और भारतीय परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। वासंती परिवेश में आयोजित एक दिवसीय कला पर्व ने कला प्रेमियों को रंगों और कल्पनाओं की एक जादुई दुनिया से रूबरू कराया। माँ सरस्वती के पूजन के साथ शुरू हुए इस उत्सव में प्रदेश के प्रख्यात कलाकारों ने खुली कार्यशाला के माध्यम से अपनी सृजन शक्ति का प्रदर्शन किया। संस्था की संस्थापक एवं वरिष्ठ चित्रकार वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि इस वर्ष कला पर्व का विषय “मेरा आंगन” रखा गया था। इसमें लगभग 50 कलाकारों ने अपनी स्मृतियों और सांस्कृतिक अनुभवों को रंगों के माध्यम से कैनवास पर उतारा। सुधा स्टूडियो (प्रगति पार्क) के परिसर को विशेष रूप से वासंती शैली और लोक सजावट से सजाया गया था, जहाँ पीले पुष्पों और प्राकृतिक तत्वों ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। :: कैनवास और काष्ठ पर कला का जीवंत प्रदर्शन :: प्रदर्शनी में चित्रकला के साथ-साथ मूर्तिकला और काष्ठ कला (वुड आर्ट) के भी सजीव उदाहरण देखने को मिले। वरिष्ठ कलाकार अनुराग जाड़िया, एच.एल. साकवार, गौरव कुलश्रेष्ठ और पंकज खरे ने काष्ठ कला के माध्यम से विशिष्ट कृतियों का निर्माण किया। वहीं बृजमोहन आर्य, सुषमा श्रीवास्तव, प्रवीण खरे, प्रदीप अहीरवाल, तृप्ति गुप्ता और उमेंद्र वर्मा सहित कई नामी कलाकारों ने ऋतुराज बसंत की संवेदनाओं को साकार रूप दिया। आयोजन में आलोक वर्मा, मधु वर्मा, हरेंद्र शाह और रुचि अग्रवाल जैसी प्रतिभाओं की कृतियां भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहीं। यह पर्व भारतीय सांस्कृतिक चेतना और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक ऐसा मंच साबित हुआ जहाँ बसंत केवल एक मौसम नहीं, बल्कि कलाकारों की कृति में एक गहरी संवेदना बनकर उतरा। प्रकाश/24 जनवरी 2026