राजगढ़(ईएमएस) पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के छोटे भाई और पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने कहा कि कांग्रेस की हार का कारण भाजपा नहीं, बल्कि कांग्रेस खुद है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने पार्टी पर भीतर से खोखला हो जाने का भी आरोप लगाया। लक्ष्मण सिंह ने कहा कि कांग्रेस 20 वर्षों से सत्ता से बाहर है, लेकिन आज तक यह तय नहीं कर पाई कि गलती कहां हुई। पार्टी की सबसे बड़ी ताकत उसकी धर्मनिरपेक्ष पहचान थी, जो अब धुंधली पड़ चुकी है। संघ का प्रभाव कांग्रेस के भीतर बढ़ा है, जिससे धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले नेता और कार्यकर्ता कम होते चले गए। उन्होंने इंदौर की घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि गंदा पानी पीने से लोगों की मौत जैसा गंभीर मामला भी कांग्रेस सड़क पर नहीं ले जा सकी। मंत्री का इस्तीफा तो दूर, संबंधित विभाग तक नहीं बदला गया। उल्टा जिस अधिकारी को हटाया गया, उसे बाद में पर्यटन विभाग का एमडी बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई। इससे सरकार को यह संदेश गया कि विपक्ष कमजोर है और दबाव बनाने की क्षमता नहीं रखता। लक्ष्मण सिंह ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस में 40 साल काम किया है और आज भी वे मन से कांग्रेसी हैं, लेकिन पार्टी में वह संघर्ष, वह आग अब नजर नहीं आती, जिसके दम पर पहले सरकारें बनी थीं। आज नेतृत्व की सबसे बड़ी कमी यह है कि फैसले ऊपर से लिए जा रहे हैं। यदि नीचे के कार्यकर्ताओं से राय लेकर उम्मीदवार तय किए जाएं, तो कांग्रेस सत्ता में लौट सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पालिका, मंडी और अन्य संस्थाओं में खुलेआम पैसों से वोट खरीदे जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस इसका प्रभावी विरोध तक नहीं कर पा रही। न सड़कों पर आंदोलन हैं, न सरकार को घेरने की रणनीति और इसी निष्क्रियता का फायदा भाजपा उठा रही है। रीजनल कांग्रेस के विचार पर लक्ष्मण सिंह ने कहा कि यदि क्षेत्रीय कांग्रेस बनती है तो यह कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनेगी। जहां कांग्रेस कमजोर है वहां रीजनल कांग्रेस चुनाव लड़े और जहां रीजनल कमजोर हो वहां कांग्रेस मिलकर लड़ाई लड़ी जाए तो सत्ता संभव है। - नए लोग कांग्रेस से जुड़ने से डरते हैं उन्होंने कहा कि आज भी सर्वे करवा लीजिए, कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। भाजपा का दबाव इतना है कि नए लोग कांग्रेस से जुड़ने से डरते हैं। सदस्यता अभियान में लोग इसलिए पीछे हट जाते हैं, क्योंकि उन्हें झूठे मुकदमों और कार्रवाई का भय दिखाया जाता है। लक्ष्मण सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि धर्मनिरपेक्षता से भटकना कांग्रेस की सबसे बड़ी ऐतिहासिक भूल है। जब तक पार्टी अपने मूल विचारों और जमीनी संघर्ष की राजनीति पर वापस नहीं लौटेगी, सत्ता का रास्ता दूर ही रहेगा। - धर्म और राजनीति को अलग रखना जरूरी सिंह ने कहा कि संतों को अपना काम करना चाहिए और नेताओं को अपना। संतों को राजनीतिक मामलों में बोलने से बचना चाहिए। धर्म और राजनीति को अलग रखना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि गाय सड़कों पर क्यों है, इसके लिए काम क्यों नहीं हो रहा। पूर्व सांसद ने अपने पुराने संघर्षों को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1993 में उन्होंने पदयात्रा की थी। उस संघर्ष का ही परिणाम है कि क्षेत्र को बड़ी जल परियोजनाएं मिलीं। जिन इलाकों में पानी की भारी किल्लत थी, वहां आज पानी उपलब्ध है। नेवज नदी में आज पानी बह रहा है, भले ही वह गंदा हो, लेकिन पानी तो है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 में जब उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा था, तब राजगढ़ क्षेत्र से मजदूरों का पलायन होता था। आज हरियाली है, बांध बने हैं, रोजगार मिला है। उन्होंने माना कि परियोजनाओं से कुछ क्षेत्र डूबे भी हैं, लेकिन बहुत से लोग पले भी हैं। - कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पावर तानाशाही लक्ष्मण सिंह ने छत्तीसगढ़ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पावर दे दी गई है, जो तानाशाही की ओर इशारा करता है। जब पुलिस और न्याय दोनों एक ही के पास होंगे, तो न्याय कौन करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के इशारे पर झूठी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि वे सामाजिक समरसता यात्रा निकाल रहे हैं, जिसकी शुरुआत राघौगढ़ से की गई थी। अब तक सात विधानसभा क्षेत्रों में यात्रा हो चुकी है। यह यात्रा किसी तामझाम के साथ नहीं निकलती। वे हाट-बाजारों में जाकर किसानों, मजदूरों और आम लोगों से सीधे संवाद करते हैं। इस दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं, जैसे नामांतरण के नाम पर दो से तीन लाख रुपए की वसूली। -निखिल कुमार (राजगढ़)25/1/2026