ब्यावर,(ईएमएस)। भौतिक सुख-सुविधाओं और करियर की दौड़ छोड़कर संयम और त्याग का मार्ग अपनाने की मिसाल एक बार फिर ब्यावर से सामने आ रही है। दरअसल 27 वर्षीय अनिष्क कांठेड़ ने अपनी कॉलेज पढ़ाई को बीच में छोड़ जैन संत बनने का निर्णय ले लिया है। वे 28 जनवरी को बीकानेर के उदासर में जैन भगवती दीक्षा ग्रहण करेंगे। यह दीक्षा उन्हें व्यसन मुक्ति के प्रणेता जैनाचार्य प्रवर रामलालजी महाराज (रामगुरु) द्वारा प्रदान की जाएगी। जानकारी अनुसार अनिष्क कांठेड़ वर्तमान में डी-फार्मा की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ब्यावर की ही रहने वाली सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर्षाली कोठारी से उन्हें गहरी प्रेरणा मिली। हर्षाली कोठारी ने प्रतिष्ठित कंपनी एडॉब के 32 लाख रुपए का सालाना पैकेज छोड़ सांसारिक जीवन का त्याग किया और दिसंबर 2024 में जैन साध्वी दीक्षा ग्रहण की। अनिष्क ने कहा कि जब उन्होंने यह देखा कि आज के दौर में कोई युवा इतना बड़ा पैकेज और सुविधाओं से भरा जीवन छोड़कर संयम का मार्ग चुन सकता है, तभी उनका मन भी बदल गया और उन्होंने संत बनने का निश्चय कर लिया। अनिष्क ने बताया कि उनके परिवार में पहले से ही धार्मिक संस्कार वाला वातावरण रहा है। इससे पहले उनके परिवार के पांच सदस्य जैन दीक्षा ग्रहण कर चुके हैं। परिवार ने भी उनके इस फैसले का सम्मान करते हुए पूरा सहयोग दिया है। अनिष्क की दीक्षा से पूर्व ब्यावर स्थित जैन जवाहर भवन में श्री साधुमार्गी जैन श्रावक संघ की ओर से धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। भगवान महावीर, आचार्य नानेश और आचार्य रामलालजी महाराज के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। विराट दीक्षा महोत्सव को लेकर श्री साधुमार्गी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष गौतम चौधरी ने कहा, व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। हिदायत/ईएमएस 25जनवरी26