राष्ट्रीय
25-Jan-2026
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इस प्रस्ताव का विरोध भारत की न्याय, बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है नई दिल्ली (ईएमएस)। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में उसके खिलाफ लाए गए प्रस्ताव का विरोध करने पर भारत का औपचारिक रूप से आभार व्यक्त किया है। यह प्रस्ताव ईरान में बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति को लेकर लाया गया था। यूएनएचआरसी के 39वें विशेष सत्र में पेश इस प्रस्ताव को 25 देशों का समर्थन मिला था, जबकि सात देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया और 14 देशों ने मतदान से दूरी बनाई। भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल रहा, जिन्होंने इस प्रस्ताव का विरोध किया। ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने सोशल मीडिया एक्स पर बयान जारी कर कहा कि मैं भारत सरकार का ईरान के पक्ष में समर्थन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। यूएनएचआरसी में इस अनुचित और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रस्ताव का विरोध भारत की न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनहोंने कहा कि यह प्रस्ताव चयनात्मक, राजनीतिक दबाव बनाने वाला और कुछ शक्तिशाली देशों के एजेंडे से प्रेरित था। भारत ने मतदान के दौरान यह स्पष्ट संकेत दिया कि वह मानवाधिकारों के मुद्दे पर राजनीतिकरण और चयनात्मक हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं है। भारत पारंपरिक रूप से संप्रभु देशों के आंतरिक मामलों में बाहरी दबाव का विरोध करता रहा है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने भारत-ईरान संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध करीब 3000 साल पुराने हैं, जो इस्लाम के उदय से भी पहले के हैं। उन्होंने बताया कि ईरान में भारतीय दर्शनशास्त्र, गणित, खगोल विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान की पुस्तकों का अध्ययन विश्वविद्यालय स्तर तक किया जाता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता भारत के साथ सहयोग और मित्रता को हमेशा प्राथमिकता देते हैं और चाबहार परियोजना जैसे साझा प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। बता दें मानवाधिकार प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में ईरान में हुए हालिया सरकार विरोधी प्रदर्शनों का भी जिक्र किया गया। मीडिया के मुताबिक इन प्रदर्शनों के दौरान 3,117 लोगों की मौत हुई, जिनमें नागरिक और सुरक्षाकर्मी शामिल थे। इन आंकड़ों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस जारी है। ईरान में ये प्रदर्शन पहले आर्थिक मुद्दों महंगाई और मुद्रा संकट को लेकर शुरू हुए थे, जो बाद में व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए। सिराज/ईएमएस 25जनवरी26