राज्य
25-Jan-2026


एम्स भोपाल का नया केप केंद्र बनेगा मरीजों का सहारा भोपाल(ईएमएस)। एम्स भोपाल ने कैंसर की बीमारी से लड़ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक विशेष पहल की है। संस्थान में कैंसर जागरूकता एवं रोगी सशक्तिकरण (कैंसर अवेयरनेस एंड पेशेंट एम्पावरमेंट - CAPE) सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य कैंसर पीड़ितों को सही, वैज्ञानिक और संवेदनशील जानकारी प्रदान करना है ताकि वे अपनी बीमारी को बेहतर तरीके से समझ सकें। यह केंद्र अस्पताल के तकनीकी इलाज और मरीज की सामान्य समझ के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम करेगा। यह केंद्र एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर के निर्देशन में तथा सेट (सिमुलेशन, ई-लर्निंग एवं टेलीमेडिसिन) समिति के मार्गदर्शन में विकसित किया गया है। केंद्र की योजना और विकास प्रक्रिया में वरिष्ठ संचार विशेषज्ञ बीरेंद्र दास ने परामर्शदाता के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अतिरिक्त, सेट समिति के प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी (डीन–अकादमिक), डॉ. संजीव कुमार (चेयरमैन, सेट), डॉ. सैकत दास (सदस्य, सेट एवं सदस्य सचिव, ट्यूमर बोर्ड) तथा डॉ. गुंजन चौकसे (सदस्य सचिव, सेट) ने इस केंद्र की स्थापना में अहम भूमिका निभाई है। केप (CAPE) सुविधा केंद्र का मुख्य लक्ष्य कैंसर से जुड़े डर और गलतफहमियों को खत्म करना है। अक्सर मरीज और उनके परिजन बीमारी के नाम से ही तनाव में आ जाते हैं, यह केंद्र उनके उसी मानसिक बोझ को कम करेगा। यहाँ उन्हें इलाज की पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी जिससे वे अपने स्वास्थ्य के लिए सही निर्णय ले सकेंगे। यह प्रयास राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के उस संकल्प को पूरा करता है जिसमें मरीज की जरूरतों को सबसे ऊपर रखने की बात कही गई है। भारत की राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण रणनीतियों के तहत समय पर बीमारी की पहचान और पूरा इलाज बहुत जरूरी है। यह केंद्र लोगों को जागरूक करेगा ताकि वे डरे बिना समय पर अपनी जांच करवाएं। जानकारी के अभाव में होने वाली देरी को कम करके यह केंद्र मरीजों की जान बचाने में सहायक होगा। यह सुविधा न केवल इलाज के दौरान बल्कि इलाज के बाद भी मरीजों की देखभाल में मदद करेगी, जिससे देश में कैंसर का प्रभाव कम हो सकेगा। इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरल कार्यप्रणाली है। यहाँ जटिल डॉक्टरी भाषा के बजाय आम बोलचाल की भाषा का उपयोग किया जाएगा। जानकारी देने के लिए वीडियो और अन्य दृश्य माध्यमों का सहारा लिया जाएगा जो हमारी संस्कृति और परिवेश के अनुकूल हों। यहाँ केवल सूचना दी नहीं जाएगी, बल्कि मरीजों के सवालों के जवाब भी दिए जाएंगे। इससे मरीज अपनी बीमारी, दवाइयों के दुष्प्रभाव और जीवनशैली के बारे में खुलकर बात कर सकेंगे। यह केंद्र कैंसर के उपचार को केवल एक डॉक्टरी प्रक्रिया न मानकर इसे आपसी संवाद और भरोसे से जोड़ने का एक बड़ा कदम है। हरि प्रसाद पाल / 25 जनवरी, 2026