:: ऑर्थोपेडिक सर्जरी का बदला स्वरूप : सर्जन बोले- मधुमेह नियंत्रित होने पर ही करें सर्जरी, धूम्रपान से बचें मरीज :: इंदौर (ईएमएस)। शहर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय ऑर्थोपेडिक कॉन्फ्रेंस इंडोकॉन 2026 के समापन दिवस पर हिप सर्जरी (कूल्हा प्रत्यारोपण) की आधुनिक चुनौतियों और उनके समाधान पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने पेरीप्रोस्थेटिक फ्रैक्चर, रिविजन सर्जरी और इम्प्लांट विफलता जैसे जटिल विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन डॉ. हेमंत मंडोवरा ने बताया कि तीसरे दिन के सत्र मुख्य रूप से उन व्यावहारिक स्थितियों पर केंद्रित रहे जहाँ सर्जन्स को सर्जरी के दौरान त्वरित और कठिन निर्णय लेने होते हैं। दिन का मुख्य आकर्षण प्रख्यात ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. डी.डी. तन्ना को दिया गया एनएचसी – इंडोकॉन ओरेशन सम्मान रहा। डॉ. डी.के. तनेजा की उपस्थिति में उन्हें सम्मानित किया गया। अपने व्याख्यान में डॉ. तन्ना ने 1954 से अब तक के सफर को साझा करते हुए बताया कि कैसे बिना आधुनिक स्कैनर्स और मशीनों के दौर से निकलकर आज ऑर्थोपेडिक विज्ञान शिखर पर पहुँचा है। कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी डॉ. अर्जुन जैन ने उनके संबोधन को युवा डॉक्टरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। :: सर्जरी की सफलता के लिए शुगर कंट्रोल और सावधानी जरूरी :: एम्स दिल्ली के पूर्व प्रमुख डॉ. राजेश मल्होत्रा ने हिप सर्जरी के जोखिमों पर महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मरीज मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित है, तो शुगर पूरी तरह नियंत्रित होने पर ही सर्जरी की जानी चाहिए ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। उन्होंने मरीजों को सलाह दी कि हीलिंग को बेहतर बनाने के लिए ऑपरेशन के बाद कुछ हफ्तों तक धूम्रपान और शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। :: रिविजन और जटिल फ्रैक्चर पर चर्चा :: एक अन्य सत्र में डॉ. जॉन मुखोपाध्याय ने पेरीप्रोस्थेटिक फ्रैक्चर के सूक्ष्म मूल्यांकन और सही तकनीक के चयन पर अनुभव साझा किए। कोर्स कन्वेनर डॉ. अभिजीत पंडित ने बताया कि तीन दिवसीय इस आयोजन में हिप फ्रैक्चर प्रबंधन, 3डी आधारित प्रक्रियाओं और स्किल-लैब प्रशिक्षण के जरिए देशभर से आए सर्जन्स की क्लिनिकल समझ को नई दिशा मिली है। प्रकाश/25 जनवरी 2026