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28-Jan-2026


- 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आगामी बजट में वित्तीय आवंटन तय होगा नई दिल्ली (ईएमएस)। आगामी बजट में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शामिल होंगी जिसने पहले ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। आयोग के अध्यक्ष नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया हैं। अन्य सदस्य एनी जॉर्ज मैथ्यू, मनोज पांडा, सौम्या कांति घोष और आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर हैं। आयोग के सचिव ऋत्विक पांडे ने भी रिपोर्ट तैयार करने में भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी रिपोर्ट की प्रति दी गई है। 16वें वित्त आयोग को एक संवैधानिक निकाय के रूप में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों का संतुलन बनाए रखना है। आयोग ने अपनी सिफारिशें 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच साल की अवधि को ध्यान में रखते हुए तैयार की हैं। इसमें राज्यों को केंद्र के करों का वितरण, अनुदान सहायता, आपदा प्रबंधन और अन्य वित्तीय प्रावधानों की समीक्षा शामिल है। 15वें वित्त आयोग ने राज्यों को केंद्र के विभाज्य करों का 41 प्रतिशत हिस्सा देने की सिफारिश की थी। इसमें भार का वितरण जनसंख्या, क्षेत्रफल, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन, वन आवरण और राजकोषीय प्रयासों के आधार पर किया गया था। 14वें आयोग ने राज्यों के हिस्से को 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया था। केंद्र और राज्यों, खासकर विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के बीच करों के वितरण को लेकर अक्सर विवाद रहा है। दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या आधारित वितरण के मानदंड पर आपत्ति जताई है, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया है, फिर भी उन्हें उनका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें आगामी बजट में वित्तीय फैसलों को दिशा देंगी और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। सतीश मोरे/28जनवरी ---