28-Jan-2026
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-एनसीपी को बड़ा जनाधार तैयार करने में निभाया अहम रोल, 1995 में बने विधायक मुंबई,(ईएमएस)। महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार की निजी विमान दुर्घटना में मौत हो गई। प्लेन की लैंडिंग के दौरान ये हादसा हुआ, जिसमें अजित पवार समेत विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई। सियासत के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने अपनी राजनीतिक कौशल के जरिए पार्टी को महाराष्ट्र में मजबूत बनाया। पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एनसीपी को एक बड़ा जनाधार तैयार करने में अहम रोल अदा किया, लेकिन 2022 में शरद पवार से अलग अपनी राजनीतिक लकीर खींची और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। अजित पवार साल 1982 में राजनीति में कदम रखा। अजित पवार प्राथमिक शिक्षा की पढ़ाई कर रहे थे, तो उस दौरान उनके चाचा शरद पवार दिग्गज सियासी नेता बन चुके थे। राजनीति में कदम रखने के बाद सबसे पहले उन्होंने एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुनाव लड़ा। वह पुणे सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए, वो 16 सालों तक इस पद पर रहे। साल 1991 में पहली बार बारामती संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी। इसके बाद शरद पवार केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री बने। यहीं से शरद पवार केंद्र की राजनीति में खुद को सक्रिय कर लिया तो अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत की कमान अपने हाथ में ले ली। अजित पवार ने अपनी मेहनत और लगन से खुद को शरद पवार के सियासी वारिस के तौर पर महाराष्ट्र में स्थापित किया। महाराष्ट्र की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली, इसके बाद साल 1995 में वो पहली बार पुणे जिले में बारामती विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद से वो लगातार इस निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रहे। उन्होंने साल 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में भी विधायक बने। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में खुद को स्थापित ही नहीं किया बल्कि अपनी पकड़ भी मजबूत की। सरकार में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्री पद संभालने का तजुर्बा है, उन्होंने राज्य सरकार में कृषि, ऊर्जा और योजना राज्य मंत्री के रूप में काम किया, उन्होंने सुधाकर नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में काम किया, इसके बाद जब उनके चाचा शरद पवार 1992 और 1993 में मुख्यमंत्री बने तो उन्हें मंत्री बनाया गया। साल 1999 में जब कांग्रेस और एनसीपी सत्ता में आई तो उन्होंने विलासराव देशमुख की सरकार सिंचाई मंत्री का कार्यभार सौंपा गया। वहीं, साल 2003-2004 में सुशील कुमार शिंदे की सरकार में उन्हें ग्रामीण विकास का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। इसके बाद उपमुख्यमंत्री बने। अजित पवार पहली बार साल 2010 के नवंबर महीने में उपमुख्मंत्री बने, इसके बाद साल 2010 में वो दूसरी बार उपमुख्यमंत्री बने। 2019 में फडणवीस के साथ डिप्टी सीएम बने और फिर उद्धव ठाकरे के अगुवाई में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी तो उसमें भी डिप्टी सीएम रहे। इसके बाद 2023 में शरद पवार के बगावत कर शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में डिप्टी सीएम बने। 2024 में छठी बार डिप्टी सीएम बने, लेकिन शरद पवार ने अपने सियासी वारिस के तौर पर बेटी सुप्रिया सुले को आगे बढ़ाने लगे तो फिर अजित पवार ने अपनी अलग सियासी राह चुन ली। एनसीपी के तमाम नेताओं को लेकर बीजेपी के अगुवाई वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए। 2023 में अजित पवार ने पूरी तरह से एनसीपी पर कब्जा जमा लिया। 2024 में खुद को स्थापित करने में भी सफल रहे। बता दें 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में अपने दादा के घर जन्मे अजित पवार, शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवरा के बेटे हैं। उनके पिता फिल्म जगत से जुड़े हुए थे। अनंतराव ने मुंबई में मौजूद वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम किया। अजित पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई और उनके दो बच्चे हैं, जिनका नाम पार्थ पवार और जय पवार है, महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल बारामती से अजित पवार ने प्राथमिक शिक्षा हासिल की, हालांकि, जब वो कॉलेज में थे तो उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद राजनीति में कदम रखा। सिराज/ईएमएस 28जनवरी26