भोपाल (ईएमएस) । यूजीसी के नए नियमों को लेकर लोगों के निशाने पर आए कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पूरे विवाद पर विस्तार से सफाई देते हुए कहा है कि संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि कई अहम सुझावों को यूजीसी ने खुद नजरअंदाज किया है। सिंह ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर इससें संबधित एक पोस्ट शेयर की है। पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने लिखा है कि ,पायल ताडवी और रोहित वेमुला की माताओं और सर्वोच्च न्यायालय के आग्रह पर, मोदी सरकार और यूजीसी ने फरवरी 2025 में यूजीसी इक्विटी विनियमों का मसौदा प्रस्तुत किया। इसका उद्देश्य कैंपस में जाति, सामाजिक पृष्ठभूमि और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकना था। दिसंबर 2025 में शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति ने इन ड्राफ्ट नियमों की समीक्षा कर एक सर्वसम्मत रिपोर्ट संसद में रखी। समिति ने माना कि नियम सही दिशा में हैं, लेकिन उन्हें और सख्त व स्पष्ट बनाए जाने की जरूरत है। संसदीय समिति की प्रमुख सिफारिशें क्या थीं? समिति ने विशेष रूप से पांच अहम सुझाव दिए, ओबीसी छात्रों और अन्य हितधारकों के उत्पीड़न को भी जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। ड्राफ्ट रेगुलेशंस में भेदभाव के एक हिस्से के तौर पर डिसेबिलिटी को साफ तौर पर शामिल किया जाना चाहिए; ड्राफ्ट रेगुलेशंस में सोची गई इक्विटी कमेटी में 10 में से सि$र्फ एक ज़रूरी महिला सदस्य और एससी, एसटी समुदायों से एक-एक ज़रूरी सदस्य का प्रावधान है। इसे फैकल्टी और स्टूडेंट पदों पर एससी, एसटी और ओबीसी के लिए 50 रिज़र्वेशन के प्रावधान के हिसाब से बढ़ाया जाना चाहिए। इसलिए, इक्विटी कमेटी को भी अपनी आधी से ज़्यादा संख्या एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों से लेनी चाहिए ताकि सही रिप्रेजेंटेशन और असरदार $फैसले लेने में मदद मिल सके; ड्राफ्ट रेगुलेशंस में, 2012 के रेगुलेशंस की तरह, भेदभाव के मामलों की सही पहचान होनी चाहिए। ऐसी डिटेल के बिना, यह तय करना इंस्टिट्यूट की मज़ीर् पर छोड़ दिया जाएगा कि शिकायत असली है या झूठी। इसलिए, रेगुलेशंस में भेदभाव वाले तरीकों की पूरी लिस्ट सा$फ तौर पर शामिल होनी चाहिए। ड्राफ़्ट रेगुलेशंस में जाति के आधार पर भेदभाव के मामलों की सालाना पब्लिक जानकारी, $फैकल्टी और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टा$फ के लिए ज़रूरी सेंसिटाइज़ेशन प्रोग्राम, और सभी ॥श्वढ्ढह्य में का$फी मेंटल हेल्थ सपोर्ट और लीगल एड की ज़रूरत होनी चाहिए। यूजीसी ने क्या माना और क्या छोड़ा? जनवरी 2026 में यूजीसी ने अंतिम इक्विटी रेगुलेशंस जारी किए। दिग्विजय सिंह के अनुसार, यूजीसी ने ओबीसी को शामिल करने, दिव्यांगता को भेदभाव के आधार मानने और वार्षिक रिपोर्ट, ट्रेनिंग व सहायता जैसे प्रावधानों को स्वीकार कर लिया। लेकिन, इक्विटी कमेटी में एससी-एसटी-ओबीसी प्रतिनिधित्व बढ़ाने और भेदभाव की विस्तृत परिभाषा तय करने जैसी सिफारिशों को त्रष्ट ने नजरअंदाज कर दिया। आशीष पाराशर/29जनवरी2026