राष्ट्रीय
30-Jan-2026
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सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि देश के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया कि हर स्कूल में लड़कियों को फ्री में सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य होगा। लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाना होगा। जो स्कूल ऐसा नहीं कर पाएंगे, उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में दिव्यांगों के अनुकूल (डिसेबल फ्रेंडली) टॉयलेट बनाए। केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति को पूरे देश में लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में बीते 4 सालों से सुनवाई चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सिर्फ फैसला सुनाया है। सोशल वर्कर जया ठाकुर ने 2022 में एक जनहित याचिका लगाई थी। उनकी मांग थी कि मेन्स्ट्रुयल हाइजीन पॉलिसी को पूरे देश में लागू करे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दो सवाल किए, अगर स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट नहीं हैं, तब यह संविधान के अनुच्छेद 14 (बराबरी का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है। अगर लड़कियों को सैनिटरी पैड नहीं मिलते, तब वे लड़कों की तरह बराबरी से पढ़ाई और गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पातीं। मासिक धर्म के दौरान सम्मानजनक सुविधा मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह आदेश सिर्फ कानूनी व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए नहीं है। यह उन क्लासरूम के लिए भी है, जहां लड़कियां मदद मांगने में घबराती हैं। यह उन टीचर्स के लिए है, जो मदद करना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण कर नहीं पाते हैं। यह उन माता-पिता के लिए भी है, जो शायद यह नहीं समझ पाते कि उनकी चुप्पी का क्या असर पड़ता है। यह समाज के लिए भी है, ताकि प्रगति का पैमाना इस बात से तय हो कि हम अपने सबसे कमजोर वर्ग की कितनी सुरक्षा करते हैं। हम हर उस बच्ची तक यह संदेश पहुंचाना चाहते हैं, जो स्कूल में अनुपस्थिति की शिकार बनी, क्योंकि उसके शरीर को बोझ की तरह देखा गया, जबकि इसमें उसकी कोई गलती नहीं है। दरअसल सोशल वर्कर ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करके लड़कियों के स्वास्थ्य सुरक्षा पर चिंता जाहिर की थी। याचिका में बताया था कि पीरियड में होने वाली दिक्कतों के कारण कई लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं, क्योंकि उनके परिवार के पास पैड पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं होता है। उन दिनों (मासिक धर्म के दिनों में) कपड़ा यूज करके स्कूल जाना परेशानी का कारण बन जाता है। स्कूलों में भी लड़कियों के लिए फ्री पैड की सुविधा नहीं है। इसकारण देश में लाखों लड़कियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं, स्कूलों में यूज्ड पैड को डिस्पोजल करने की सुविधा भी नहीं है, इसकारण भी लड़कियां पीरियड्स में स्कूल नहीं जा पातीं। आशीष दुबे / 30 जनवरी 2026