नई दिल्ली (ईएमएस)। ब्रेस्ट कैंसर के मामले भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं और यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि युवा महिलाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। आईसीएमआर और अन्य शोध संस्थानों की स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बदलती जीवनशैली, नींद की कमी और बढ़ता मानसिक तनाव इस गंभीर बीमारी के प्रमुख कारण बन गए हैं। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सालाना लगभग 6 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं। पहले यह बीमारी आमतौर पर 50 वर्ष की आयु के बाद देखी जाती थी, लेकिन अब 35 से 50 वर्ष की महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। देर से शादी, बच्चों को स्तनपान न कराना और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसे बढ़ाने वाले मुख्य कारण हैं। नींद की कमी और ब्रेस्ट कैंसर के बीच गहरा संबंध पाया गया है। स्टडी में सामने आया है कि पर्याप्त नींद न लेने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे एस्ट्रोजन हार्मोन असंतुलित हो जाता है। नींद के दौरान शरीर अपने सेल्स और डीएनए की मरम्मत करता है, लेकिन नींद की कमी इस प्रक्रिया को प्रभावित करती है। परिणामस्वरूप कैंसर कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं और लगातार थकान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है। मोटापा और एस्ट्रोजन का खतरनाक संबंध भी इस बीमारी को बढ़ाता है। विशेषज्ञों के अनुसार पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है। मेनोपॉज के बाद शरीर में जमा फैट एस्ट्रोजन का मुख्य स्रोत बन जाता है। अधिक एस्ट्रोजन का स्तर ब्रेस्ट सेल्स में कैंसर की गांठ पैदा कर सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि केवल मैमोग्राफी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। जीवनशैली में बदलाव बेहद जरूरी हैं। रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना या व्यायाम करना, योग और ध्यान के जरिए मानसिक तनाव कम करना, और अपने स्तनों की मासिक स्वयं-जांच करना महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार की गांठ, असामान्य बदलाव या दर्द दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। सुदामा/ईएमएस 01 फरवरी 2026